सुरक्षा दीवार न होने से भूस्खलन का खतरा
वहीं, गर्मियों की जून महीने की छुट्टी को जुलाई में समायोजित किया जाए। ताकि बरसात में शिक्षकों और छात्रों को दिक्कत न हो। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बताते हैं कि मैदानी क्षेत्रों के स्कूलों में जलभराव हो रहा है। जबकि पर्वतीय जिलों के कई स्कूलों में सुरक्षा दीवार न होने से भूस्खलन का खतरा बना है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डाॅ. मुकुल कुमार सती के मुताबिक माध्यमिक में केवल 19 विद्यालय भवन जर्जर हाल थे। इसमें से कुछ को ध्वस्त कर नए विद्यालय भवन बनाए जा चुके हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जर्जर स्कूल भवनों में बच्चों को न बैठाया जाए।
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इन जिलों में इतने स्कूल भवन जर्जर हाल
| जिला |
स्कूल |
| अल्मोड़ा |
135 |
| बागेश्वर |
06 |
| चमोली |
18 |
| चंपावत |
16 |
| देहरादून |
84 |
| हरिद्वार |
35 |
| नैनीताल |
125 |
| पौड़ी |
107 |
| पिथौरागढ़ |
163 |
| रुद्रप्रयाग |
34 |
| टिहरी |
133 |
| ऊधमसिंह नगर |
55 |
| उत्तरकाशी |
12
|
छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए महानिदेशक ने दिए निर्देश
शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शिक्षा महानिदेशक ने कहा, छात्र-छात्राओं को जीर्ण-शीर्ण भवन, कक्ष या दीवार की ओट में न बैठाया जाए। स्कूल के आस-पास बरसाती नाला हो तो बरसात के समय छात्र-छात्राओं के विद्यालय आने-जाने के लिए विशेष सावधानी बरती जाए। वहीं, स्कूल परिसर में पानी एकत्र न होने दें।