अलग-अलग टीमें गठित कर लगातार दबिश दी गई
इस पेचीदा मामले की गुत्थी सुलझाने में तत्कालीन सिडकुल थाना प्रभारी और वर्तमान में हिंडोलाखाल थानाध्यक्ष लखपत सिंह बुटोला की कार्यकुशलता निर्णायक साबित हुई। उस चुनौतीपूर्ण समय में लखपत बुटोला के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों को बड़ी बारीकी से जोड़ा।
थानाध्यक्ष लखपत बुटोला ने बताया कि उस समय आरोपियों तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि परिस्थितियां विपरीत थीं। लेकिन टीम ने हार नहीं मानी और अलग-अलग टीमें गठित कर लगातार दबिश दी गई। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी रोहित की लोकेशन ट्रेस कर उसे उत्तर प्रदेश के कौशांबी से गिरफ्तार किया गया, जबकि सह-अभियुक्ता मंजू को डेंसो चौक के पास से पहले ही दबोच लिया गया था।
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न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों को पेश कर अपराध की गंभीरता को सिद्ध किया। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का सूक्ष्मता से परीक्षण करने के बाद यह माना कि रोहित ने न केवल हत्या की, बल्कि साक्ष्य मिटाने का भी कुत्सित प्रयास किया। पुलिस की तत्परता और सटीक चार्जशीट के कारण ही आज पीड़िता को न्याय मिल सका है। अदालत के इस फैसले को समाज में एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।