उत्तराखंड सरकार ने गन्ने की पिराई और मूल्य को लेकर फंसा पेंच ढीला कर लिया है। गन्ना विकास मंत्री और चीनी मिल मालिकों के बीच सहमति के बाद सरकार की मुश्किलें खत्म हुई हैं।
उत्तराखंड की तीनों निजी चीनी मिलों में पांच दिसम्बर से पिराई का काम शुरू हो जाएगा। वहीं गन्ना मूल्य को लेकर सरकार ने फैसला लिया है कि यहां के किसानों को यूपी से पांच रुपए अधिक दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के निर्देश पर गन्ना विकास मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने निजी चीनी मिल मालिकों से बातचीत की। जिसके बाद तय हुआ कि हर हाल में पांच दिसम्बर से पिरोई शुरू की जाए। किसानों के पुराने भुगतान को लेकर चीनी मिल मालिक सरकार से आर्थिक मदद चाह रहे थे।
285 रुपए दिया जाएगा
वहीं पिछली बार की तरह ही सॉफ्ट लोन की भी मांग थी। सरकार ने कुछ रियायतें तो दी लेकिन किसी तरह केलोन या किसानों केभुगतान से इंकार कर दिया। बैठक में तय हुआ कि यूपी ने गन्ने की कीमत 280 रुपए तय की है लिहाजा यहां 285 रुपए दिया जाएगा।
निजी चीनी मिल मालिक सरकार से काफी उम्मीद लगाए थे। शायद पिराई का काम रोकने केपीछे उनका मकसद ही यही था। दरअसल पिछले बार भी सरकार ने लोन के रूप में मिलों की आर्थिक मदद की थी।
सरकार ने को-ऑपरेटिव की मदद से 45.54 करोड़ रुपए 4 प्रतिशत सॉफ्ट लोन के रूप में दिए थे। जिसकी भरपाई मिलों को यूपीसीएल केमाध्यम से तीन साल में करनी थी। मिलों ने पूरी रकम नहीं लौटाई है।
पैकेज से पसीजे चीनी मिल मालिक
चीनी मिल मालिकों को मनाने केलिए सरकार ने कुछ रियायत दी है। गन्ने की खरीद पर लिए जाने वाले परचेज टैक्स और सोसायटी कमीशन को माफ किया जाएगा। इसके अलावा गन्ने से प्राप्त बगास पर लगने वाले वैट और शीरा पर लगने वाले प्रशासनिक चार्ज को भी माफ करने के लिए कैबिने में विचार किया जाएगा।
गन्ना मंत्री ने मिल मालिकों को उत्तर प्रदेश से अधिक सहूलियत देने का आश्वासन भी दिया है। गन्ना मंत्री प्रधानमंत्री से मिलकर उत्तराखंड चीनी मिलों को घाटे से उबारने केलिए विशेष पैकेज केअनुरोध की बात भी की है।