वर्ष 1990 में जब हाईस्कूल पास किया तो पिता सत्यप्रसाद शर्मा के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच आईं। बोले-‘बेटा, अगर ज्यादा पढ़ेगी तो तेरे लिए पढ़ा-लिखा लड़का भी ढूंढना पड़ेगा।’
नीरा ने पिता की चिंता समझ स्कूल छोड़ दिया। लेकिन हौसला कम न हुआ। प्ले स्कूल में छह साल तक पढ़ाया। फिर सुनील तिवाड़ी से शादी हो गई। उनकी टेलरिंग की दुकान थी। यह इत्तेफाक था कि सुनील भी हालात की वजह से अधिक पढ़ नहीं पाए थे।
यह दुख उन्हें भी सालता था, वह मेरी इच्छा समझ गए और पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। ससुराल वाले पक्ष में नहीं थे, लेकिन पति की प्रेरणा से हौसले बुलंद थे। स्कूल छूटने के नौ साल बाद पढ़ाई का सिलसिला फिर शुरू हुआ। राजकीय कन्या इंटर कालेज राजपुर रोड में इंटर में प्रवेश लिया। उस वक्त तक एक बेटा और बेटी हो चुके थे।