उत्तराखंड की बेटी नरे शिक्षा पाने के लिए पूरे गांव की सोच ही बदल डाली। कैसे, जानने के लिए पढ़ें...
'मैं सोनम राणा उत्तराखंड में दुर्गम के गांव खलियान बांगर की रहने वाली हूं। हम तीन भाई बहन हैं जिनमें मैं सबसे छोटी हूं। मेरे पिता विजेंद्र सिंह गांव में ही पोस्टमास्टर हैं और मां देवकी देवी गृहिणी हैं। हमारे गांव के बच्चे पढ़ाई के लिए तीन किमी. दूर स्थित जीआईसी, कैलाश बांगर आते हैं।
पहले हमारे गांव में बेटियों को उच्च शिक्षा नहीं दी जाती थी। मैं भी यही सोचती थी कि लड़कियों को ज्यादा शिक्षित करने से क्या फायदा है। उन्हें तो शादी करके दूसरे के घर जाना है। लेकिन कक्षा सात में महादेवी वर्मा पर आधारित पाठ ने मेरी सोच बदल दी।
इससे मुझे सीख मिली कि महिला किस तरह समाज के विकास में अपना सहयोग कर सकती है। इसी से प्रेरणा लेकर मैने गांव में लड़कियों की शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने की ठानी। इसके लिए मैने अपने घर से ही शुरुआत की।