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नेताजी को उत्तराखंडी जांबाजों पर था सबसे ज्यादा भरोसा

Tue, 06 Dec 2016 02:44 PM IST
अमरनाथ / अमर उजाला, भीमताल
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस - फोटो : pti
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आजाद हिंद फौज के मुखिया सुभाष चंद्र बोस ने अपनी सेना में सबसे ज्यादा भरोसा उत्तराखंडियों पर ही किया।
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उनके पर्सनल एड्जुटैंट से लेकर इस फौज में कई बड़े अधिकारी उत्तराखंड के ही थे। देश की आजादी के बाद पहली बार उत्तराखंड के समूचे इतिहास पर प्रकाशित हो रही ‘उत्तराखंड का समग्र राजनैतिक इतिहास’ लिखने वाले डा. अजय सिंह रावत ने पुस्तक के विमोचन समारोह के दौरान इसका खुलासा किया।

बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड साइंसेज परिसर में सोमवार को आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में प्रसिद्ध पर्यावरणविद और इतिहासकार डा. अजय रावत ने पाषाण युग से लेकर 1949 तक के उत्तराखंड के गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि देश की आजादी के लिए संगठित आजाद हिंद फौज में उत्तराखंड के लोगों का सर्वाधिक योगदान रहा। उस दौरान 600 उत्तराखंडी शहीद हुए थे।
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डा. रावत के मुताबिक ज्ञान सिंह बिष्ट और महेंद्र सिंह बागड़ी की वीरता उल्लेखनीय रही। देश के लिए बलिदान और वीरता के चलते उत्तराखंड के लोगों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का मन मोह लिया और आजाद हिंद फौज में अहम पद हासिल किए। लेफ्टिनेंट कर्नल चंद्र सिंह नेगी को सिंगापुर में ऑफीसर्स ट्रेनिंग स्कूल में कमांडर नियुक्त किया गया।

मेजर देब सिंह दानू को नेताजी के पर्सनल एड्जुटैंट के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया। इसी तरह मेजर पदम सिंह को तीसरी बटालियन के कमांडर और लेफ्टीनेंट कर्नल पीएस रतूड़ी सुभाष रेजीमेंट की प्रथम बटालियन के कमांडर नियुक्त हुए। उन्हें 1944 की बर्मा कैम्पेन में अदम्य शौर्य दिखाने और सामरिक महत्व की पोस्टों पर अधिकार करने के लिए सरदार-ए-जंग की उपाधि से सम्मानित किया।

बता दें कि नैनीताल निवासी प्रो. रावत हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर नैनीताल के नैसर्गिंक सौंदर्य को बचाने की कोशिश करने के लिए चर्चा में रहे हैं। वह पहले एशियाई हैं, जिन्हें इंटरनेशनल यूनियन ऑफ फारेस्ट्री रिसर्च आर्गेनाइजेशन का चेयरमैन (1995-2005 तक) बनाया गया था।
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भवानी सिंह ने दी चंद्रशेखर आजाद को पिस्तौल चलाने की ट्रेनिंग

आजाद जयंती - फोटो : Self
डॉ. रावत की पुस्तक में दावा किया गया है कि गढ़वाल के भवानी सिंह, इंद्र सिंह गढ़वाली और बच्चूलाल ने चंद्रशेखर आजाद, शंभुनाथ आजाद और रोशन लाल के क्रांतिकारी संगठनों में न केवल सक्रिय रूप से हिस्सा लिया, बल्कि भवानी सिंह ने चंद्रशेखर आजाद को पिस्तौल चलाने की ट्रेनिंग भी दी थी।

इसका साक्ष्य प्रो. रावत के पास मौजूद है। मद्रास बम कांड में भाग लेने के चलते इंद्र सिंह गढ़वाली को 20 साल के कालापानी की सजा सुनाई गई, जबकि ऊटी बैंक डकैती में पकड़े जाने पर बच्चूलाल ने 18 साल की सजा पाई।  
 
उत्तराखंड में महिला सत्याग्रहियों की पहली गिरफ्तारी 
जंगलों, वन्यजीव, हिमालय, पूर्वी यूपी में बाढ़ आदि पर आठ से अधिक किताबें लिख चुके प्रो. अजय रावत ने अपनी नई पुस्तक ‘उत्तराखंड का समग्र राजनैतिक इतिहास’ में लिखा है कि देश की आजादी के लिए कुमाऊं की महिलाएं भी आंदोलित हुई थीं।

उनकी सक्रियता के चलते ही 1931 में बागेश्वर में महिला सम्मलेन आयोजित हुआ, जिसमें विदेशी कपड़ों तथा नशीले पदार्थों के विरोध के साथ-साथ खादी के प्रचार-प्रसार का फैसला किया गया। विदेशी कपड़ों के बहिष्कार के लिए कुंती वर्मा की अगुवाई में महिलाओं का एक दल हल्द्वानी आया, जहां उन्होंने दुकानों में धरना दिया।

इस विरोध के कारण कुंती वर्मा, मंगला देवी, जीवंती देवी, भगीरथी देवी, पदमा देवी, धनी देवी आदि को गिरफ्तार किया गया। डा. रावत का दावा है कि यह उत्तराखंड में महिला सत्याग्रहियों की पहली गिरफ्तारी थी।
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