18 अगस्त 2022 को निर्णय सुरक्षित रखा गया और सोमवार को सजा का एलान कर दिया गया। अदालत ने मुकदमे की धारा 406 (अमानत में खयानत) में सभी को दोषमुक्त कर दिया। धोखाधड़ी और जालसाजी की चार धाराओं में पांच-पांच साल कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना यानी तीनों पर कुल 20-20 हजार का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना न देने पर एक-एक माह सजा अलग से भुगतनी होगी।
अदालत ने दिए थे सरेंडर करने के आदेश
मनीष वर्मा और उनके परिजन अदालत में पेश नहीं हो रहे थे। इस पर अदालत ने उन्हें पिछले साल सितंबर में सरेंडर करने के आदेश दिए थे। नहीं तो गिरफ्तार करने की चेतावनी दी गई थी। इस पर मनीष वर्मा ने कुछ दिन बाद अदालत ने सरेंडर कर दिया था।
पहले लगाई थी एफआर फिर लगी चार्जशीट
इस मामले में कैंट पुलिस ने पहले एफआर लगा दी थी, लेकिन बाद में खुद ही चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इसी को बचाव पक्ष ने आधार भी बनाया। अदालत में दलील दी गई कि पहले एफआर और फिर चार्जशीट लगाई गई। ऐसे में यह मामला संदेह का नजर आता है। जबकि, कोर्ट ने इस मामले में कोई आदेश नहीं दिए थे, लेकिन बचाव पक्ष के इस आधार को न्यायालय ने खारिज कर दिया।