हिमालय में ब्लैक कार्बन का अब सटीक डाटा मिल जाएगा। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) और एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि श्रीनगर संयुक्त रुप से हिमालयी क्षेत्र और ग्लेशियरों में इसका जमीनी अध्ययन करेंगे। इसके लिए विभिन्न स्थानों में ब्लैक कार्बन एरोसोल मीजरमेंट स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
प्रथम चरण में माणा (बदरीनाथ) के समीप स्टेशन स्थापित किया जा रहा है, जो कार्बनेसियस एरोसोल (सूक्ष्म कण, जो आंख से नहीं दिखाई देते हैं), ग्लेशियर और वातावरण का भौतिक व रसायनिक विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार करेगा। यह रिपोर्ट भारत सरकार को दी जाएगी, ताकि उसकी मात्रा कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे।
आईआईटीएम के दिल्ली यूनिट के ऑफिस इंचार्ज (उप निदेशक) डा. सुरेश तिवारी ने बताया कि कार्बनेसियस एरोसोल मुख्यत: दो अवयवों आर्गेनिक कार्बन और ब्लैक कार्बन से मिलकर बनता है। ब्लैक कार्बन काफी खतरनाक है। यह एक हफ्ते तक वातावरण में उड़ता रहता है। यह मैदानी क्षेत्रों से उड़कर हिमालय में जमा हो जाता है। जब यह ग्लेशियर में जमा होता है, तो सूर्य की किरणों को बहुत तेजी से अवशोषित करता है, जिससे ग्लेशियर की ऊपरी परत गरम हो जाती है और ग्लेशियर पिघलने लगते हैं।