कहा कि जब हम आठ किमी आगे दौड़ गए, तब हमें वापसी की जानकारी दी गई, जो पूरी तरह खेल, खेल भावना व खिलाड़ी के साथ अन्याय है। रामलीला मैदान में आयोजन में हावी रही अव्यवस्थाओं को लेकर धावक-धाविकाओं ने जमकर हंगामा किया। जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने छात्र-छात्राओं की बात सुनने के बाद प्रतियोगिता को निरस्त घोषित कर दिया गया।
धाविका निशा जोशी ने बताया कि वह मैराथन में दौड़ते समय एजेंसी चौक के पास पहुंचीं। ट्रैक को लेकर दुविधा होने पर तैनात पुलिस जवानों को पूछा कि इससे आगे कहां जाना है, तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बॉर्डर पर जाना है। धाविका निशा ने बताया स्थानीय लोगों ने बताया कि फिनिश प्वाइंट रामलीला मैदान है। पुलिस जवानों के व्यवहार से धाविका की आंखें आंसुओं से भर आईं।
विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही बनीं मातृशक्ति की ताकत
विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही शीतल मानसून मैराथन में मातृशक्ति की ताकत बनीं। शीतल ने इस दौरान बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश भी दिया। शीतल पिथौरागढ़ के सल्मोड़ा गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता चालक और माता गृहणी है। शीतल के दो छोटे भाई हैं। स्कूली शिक्षा के दौरान एनसीसी का हिस्सा बनना शीतल के जीवन को दिशा दे गया।
दार्जिलिंग व जम्मू कश्मीर में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लेने के बाद शीतल ने वर्ष 2018 में कंचनजंघा पर्वत पर तिरंगा फहरा विश्व की सबसे युवा पर्वतारोही बनकर गिनीज बुक आफ वर्ड रिकार्ड में स्थान बनाया।
इसके बाद विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतह करने वाली व सबसे कम उम्र की उत्तराखंड की पहली युवा बनी। उन्होंने इसकी शुरुआत उत्तरकाशी के रुद्र गैरा ट्रैक पर ट्रेकिंग से की। शीतल ने सतोपंथ, त्रिशूल सहित अन्य कई पर्वत चोटियों पर तिरंगा फहराया है।