द ग्रेट खली रिटर्न्स शो को सफल बनाने के लिए दूर-दराज से लगभग पांच हजार बच्चों को स्टेडियम में तो लाया गया, लेकिन मुकाबला खत्म होते ही उनको उनके हाल पर छोड़ दिया गया। छात्रों के साथ आए टीचर भी परेशान हुए।
उनके सामने बड़ा सवाल यह था कि इतनी रात बच्चों को वापस कैसे लेकर जाएं? कुछ टीचर तो बच्चों को पार्किंग में खड़ी बसों में बच्चों को सुलाकर इंतजाम के लिए अधिकारियों को तलाशते रहे। रात साढ़े बारह बजे एडीएम प्रताप शाह पहुंचे, लेकिन समाधान निकालने के बजाए उन्होंने टीचरों को हड़का दिया। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि उन्हें इंतजाम करके आना चाहिए था। खबर लिखे जाने तक कोई समाधान नहीं निकला था।
कार्यक्रम के आयोजन के दौरान स्टेडियम में अव्यवस्थाएं हावी रही। प्रोग्राम खत्म होते ही प्रशासन का अमला वीआईपी को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाने में जुटा रहा। टिहरी जनपद के चमियाला, जौनपुर, घनसाली, चंबा, नरेंद्रनगर आदि क्षेत्रों से आए लगभग डेढ़ सौ स्कूली बच्चे रात भर भूखे प्यासे भटकते रहे।
बच्चों के साथ आए टीचरों ने एडीएम प्रताप शाह को बताया कि उन्हें बताया गया था कि आयोजन स्थल पर भोजन मिलेगा, लेकिन न दिन में ऐसा हुआ न ही रात का खाना मिला। देर रात बच्चों को लेकर कहां जाएं? रात साढ़े बारह बजे तक टीचर भटकते रहे, जबकि कुछ ने रात को निकलने का मन तो बनाया, लेकिन प्रशासन से तालमेल नहीं हो पा रहा था।
कुछ ने बच्चों को बसों में बैठा दिया और वहीं दिन निकलने का इंतजार करने का निर्णय लिया। करीब डेढ़ सौ बच्चे दिनभर से भूखे प्यासे बसों में सोने को मजबूर हुए। एडीएम उनको किसी गुरुद्वारे में ले जाने की बात करते रहे, लेकिन खबर लिखे जाने तक यह स्थिति साफ नहीं हुई कि दो घंटे से ठंड में ठिठुर रहे बच्चों के लिए प्रशासन कहां इंतजाम करेगा।