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IIप्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में बीते वर्ष छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए। लेकिन छात्रों से छात्रसंघ चुनाव के नाम पर लिया गया शुल्क अब सवालों के घेरे में हैं। छात्रों का कहना है कि इस शुल्क का इस्तेमाल छात्रों के हित के लिए किया जाना था। लेकिन साल बीत गया और शुल्क का कोई पता नहीं। छात्रसंघ चुनाव के लिए प्रत्येक छात्र से 80 से 120 रुपये तक लिए गए थे। दरअसल बीते वर्ष छात्रसंघ चुनाव के संबंध में दायर जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने यह कह कर निरस्त कर दिया था कि चुनाव कराने की समय सीमा निकल चुकी है। इसके बाद किसी भी महाविद्यालय में चुनाव से संबंधित कोई कार्यक्रम भी नहीं हुए।ऐसे में छात्रों का कहना है कि उनसे लिए गए शुल्क का अभी तक कोई इस्तेमाल नहीं किया गया। छात्रों को यह रकम लौटाई गई तो ब्याज समेत यह लौटानी होगी। डीएवी के छात्र अंकित जोशी व डीबीएस की छात्रा आयुषी ने कहा, शुल्क का इस्तेमाल कॉलेज में पुस्तकालय व अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस फंड पर पूरी तरह छात्रों का अधिकार होता है। लेकिन अभी तक यह फंड सिर्फ जमा है।I