उत्तराखंड में अब छात्रसंघ चुनाव के लिए एक विवि और उससे संबद्ध कॉलेजों के लिए एक ही दिन तय किया जा रहा है। खास बात यह है कि नामांकन से लेकर चुनाव तक केवल एक हफ्ते का समय दिया जाएगा। अभी तक कई कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव की तिथि एक-एक महीने पहले ही तय कर दी जाती है। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि हर साल छात्रसंघ चुनाव की वजह से छात्रों की पढ़ाई का नुकसान होता है।
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री ने छात्र नेताओं के सामने छात्रसंघ के हर पहलू और हर समस्या में बदलाव का खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि कॉलेज में छात्रसंघ प्रत्याशी को छात्रों के बीच किसी विषय पर अपनी बात रखकर उनका दिल जीतना होगा। अब मोटा खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि जिन कॉलेजों में छात्र संख्या 500 से कम है, वहां वे चाहें तो छात्रसंघ कोष का शुल्क प्रति छात्र बढ़ा सकते हैं। इसके लिए केवल प्राचार्य पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरकार चाहती है कि हर कॉलेज के छात्रसंघ कोष का खाता प्राचार्य, डीन स्टूडेंट वेलफेयर, चुनाव अधिकारी, छात्रसंघ अध्यक्ष और महासचिव के संयुक्त नाम से संचालित होगा। उन्होंने कहा कि इस साल से हर विवि के छात्र महासंघ में भी प्रति छात्र पांच रुपये कोष में जमा किया जाएगा ताकि वे भी कोई आयोजन करा सकें।
उन्होंने कहा कि छात्र नेताओं की इच्छा के मुताबिक ही लिंगदोह समिति की सिफारिशों में बदलाव हो रहे हैं। उन्होंने सभी छात्र नेताओं से सुझाव मांगते हुए कहा कि इसके बाद भी छात्र नेता चाहें तो रिव्यू समिति के पास लिखित सुझाव दे सकते हैं। 15 जुलाई को समिति अपनी रिपोर्ट देगी। सम्मेलन में रिव्यू कमेटी के अध्यक्ष प्रो. एचएस धामी ने कई अहम सिफारिशें छात्र नेताओं के समक्ष रखीं, जिनमें ज्यादातर पर मुहर लग गई। रिव्यू समिति के सदस्य डॉ. उदय सिंह रावत ने कहा कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों के तहत निर्धारित 15 जुलाई तक रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। सम्मेलन में दून विवि के कुलपति प्रो. चंद्रशेखर नौटियाल, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. सविता मोहन, दून विवि के प्रभारी कुलसचिव प्रो. एचसी पुरोहित, श्रीदेव सुमन विवि के कुलसचिव प्रो. दीपक भट्ट सहित छात्र नेता और शिक्षाविद् मौजूद रहे।
मुख्य बदलाव की सिफारिशें
-छात्रसंघ चुनाव में एक पदाधिकारी के खर्च की सीमा 5,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये की जाती है। खर्च पर एक स्वतंत्र पर्यवेक्षक नजर रखेगा। उल्लंघन करने पर प्रत्याशी का नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।
-अब शपथ-पत्र के आधार पर नहीं बल्कि गत वर्ष और इस वर्ष की 75 प्रतिशत उपस्थिति के आधार पर ही नामांकन का मौका मिलेगा। छात्रसंघ चुनाव के प्रत्याशी की उपस्थिति सत्यापित की जाएगी।
-प्रदेश में छात्र महासंघ चुनाव में एक नियम चलेगा। जो छात्र नेता विवि प्रतिनिधि के चुनाव जीतेंगे, वही छात्र महासंघ में चुनाव लड़ेंगे। अभी गढ़वाल विवि में यह नियम है। कुमाऊं विवि में कोई भी महासंघ का चुनाव लड़ सकता है।
-प्रत्याशियों और उनके समर्थकों को महाविद्यालय या विवि परिसर से बाहर जुलूस निकालने, जनसभा करने या किसी भी तरह का प्रचार करने की अनुमति नहीं होगी। प्रत्याशी लाउडस्पीकर वाहन और जानवरों का प्रयोग नहीं कर सकेंगे।
-कॉलेज या विवि की किसी भी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर संबंधित प्रत्याशी या सभी प्रत्याशी जिम्मेदार माने जाएंगे। इस बदलाव के बाद छात्र नेता अब कॉलेज की दीवारों का इस्तेमाल प्रचार सामग्री के लिए नहीं कर सकेंगे। -महाविद्यालय या विवि में छात्रसंघ चुनाव के दौरान जिला प्रशासन के स्तर से निष्पक्ष पर्यवेक्षक अनिवार्य रूप से तैनात किए जाएंगे, जो नामांकन से लेकर परिणाम तक पर नजर रखेंगे। गड़बड़ी पर चुनाव निरस्त करने का अधिकार होगा।
-छात्रसंघ से चुने गए पदाधिकारी संबंधित विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद या कॉलेजों की एग्जीक्यूटिव कमेटी में नामित होंगे।
-छात्रसंघ एवं महासंघ में छह-छह पद नामांकन के आधार पर भरे जाएंगे। इसमें दो छात्र विवि स्तर के टॉपर, दो छात्र खेलकूद के श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले और दो छात्र सांस्कृतिक कार्यकलापों में नाम रोशन करने वाले होंगे।
एक जुलाई से शुरू होगा पुस्तक दान अभियान
सरकार एक जुलाई से प्रदेशभर के महाविद्यालयों में पुस्तकों की कमी दूर करने के लिए पुस्तक दान अभियान शुरू करने जा रही है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति पुस्तक दान कर सकता है। दूसरी ओर, कई मदों में शुल्क बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। छात्र संघ सम्मेलन में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि पहली से 30 जुलाई तक प्रदेश में पुस्तक दान अभियान चलेगा। इसके तहत कोई भी छात्र अपनी एक पुस्तक दान कर सकता है। शिक्षक या अन्य कोई व्यक्ति चाहे तो पुस्तकों के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय के खाते में पैसा भी जमा करा सकता है। इस अभियान के बाद जो भी पुस्तकें एकत्र होंगी, उन्हें उन सभी महाविद्यालयों में भेजा जाएगा, जहां पुस्तकों की भारी कमी है। इसके अलावा, जिन कॉलेजों में लाइब्रेरी है, वहां छात्रों से कॉशन मनी ली जाएगी ताकि वहां पुस्तक खोने पर छात्र की कॉशन मनी से उसका पैसा वसूला जा सके। इससे पुस्तकों की कमी धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। वहीं, जिन कॉलेजों में साइकिल स्टैंड या बाइक स्टैंड है या फिर अलग-अलग पत्रिकाएं प्रकाशित होती हैं, उनका मूल्य भी प्रदेशभर में एक साथ रिवाइज किया जाएगा। डॉ. रावत ने छात्र नेताओं से आह्वान किया कि अगर वे चाहें तो स्वेच्छा से अपने कॉलेज या विवि के विकास के लिए फीस दे सकते हैं।