नई शिक्षा नीति में यह कहा गया है कि प्रत्येक छात्र को बहुभाषी होना चाहिए। उसे स्थानीय भाषा में भी अध्ययन करना चाहिए और हर भाषा का ज्ञान होना चाहिए। ऐसे में अगर किसी किताब में माता-पिता की जगह अम्मी और अब्बू लिखा है तो वह गलत कैसे? यह बात डायट के प्राचार्य राकेश जुगरान ने कही।
कक्षा दो की अंग्रेजी की किताब गुलमोहर में अम्मी और अब्बू शब्द आने पर अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से शिकायत की थी। शिक्षा विभाग ने मामले की जांच डायट को सौंपी थी। प्राचार्य राकेश जुगरान ने कहा कि जांच प्रक्रिया के दौरान नई शिक्षा नीति के तहत आई किताबों का अध्ययन कर रहे हैं। किताबों में यही लिखा है कि छात्र को बहुभाषी होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गुलमोहर किताब में जिस कहानी में अम्मी और अब्बू लिखा है उसका पात्र एक मुस्लिम लड़का है। उसका नाम आमिर है। अगर आमिर अपनी स्थानीय भाषा में अम्मी और अब्बू कह रहा है तो इसमें कुछ गलत नहीं है। राकेश ने बताया कि अगले दो दिन में वह जांच शिक्षा विभाग को सौंप देंगे।
‘भारत को समझने के लिए भाषाओं का ज्ञान जरूरी’
राकेश कहते हैं कि भाषाएं बदलती रहती हैं। अलग-अलग राज्यों के लोग एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं। ऐसे में भाषाओं की अदला-बदली भी होती है। भारत देश को समझने के लिए सभी भाषाओं का ज्ञान होना जरूरी है। कोई माता-पिता बोलता है तो कोई मदर-फादर, वहीं कुछ बच्चे माई और अम्मा भी बोलते हैं।
यह है मामला
कक्षा दो की गुलमोहर-दो नाम की किताब के एक पाठ में मम्मी और पापा की जगह अम्मी और अब्बू लिखा है। यह किताब ओरिएंट ब्लैंक स्वान हैदराबाद की ओर से प्रकाशित है। किताब सिर्फ देहरादून में ही नहीं अन्य जगहों पर भी आईसीएसई बोर्ड के अंग्रेजी माध्यम में पाठ्यक्रम का भाग है। इस किताब को जिले में प्रतिबंधित करने की मांग भी की गई थी।