जिसमें 6 से 17 साल तक के 3280 बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया था। इसमें 2500 बालिकाएं व 780 बालक शामिल हैं। जबकि 18 से 21 आयु वर्ग के 475 ड्राप आउट बच्चे मिले। संस्था के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि ड्राप आउट बच्चों को ढूंढ कर उन्हें दोबारा से स्कूल में दाखिला कराने के लिए संस्था काम कर रही है।
हरिद्वार जिला के भगवानपुर, रुड़की, नारसन, लक्सर, बहदराबाद ब्लाक के अंतर्गत आने वाले विभिन्न स्कूलों में अप्रैल माह में 608 ड्राप आउट बच्चों का प्रवेश दिलाया गया। उन्होंने बताया कि ड्राप आउट बच्चों को दोबारा से विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के लिए काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकतर ड्राप आउट बच्चों के पास आवश्यक दस्तावेज न होने के कारण उन्हें दाखिला नहीं मिल पा रहा है।
संस्था की निदेशक आंजुला त्यागी का कहना है कि ड्राप आउट बच्चों का स्कूलों में दाखिला करने से शिक्षा स्तर में सुधार नहीं आएगा। बल्कि इसके लिए शिक्षा नीति में बदलाव करने की जरूरत है। संस्था जल्द ही ड्राप आउट की समस्या का समाधान निकालने के लिए शिक्षा विभाग से मिल कर कार्य योजना तैयार करेगी।