नीट की स्टेट काउंसिलिंग में सरकारी सस्ती एजुकेशन की सुविधा का लाभ लेना भी मुसीबत बन गया है। इसके लिए छात्र और सरकार के बीच बांड होता है। इसकी शर्तें छात्रों के पसीने छुड़ा रही हैं। इसमें छात्र को लैंड श्योरिटी नोटरी कराकर देनी है, जिस पर कोई लोन या विवाद नहीं होना चाहिए।
प्रदेश में सस्ती मेडिकल एजुकेशन के लिए बांड की सुविधा है। इसके लिए बनाई गई शर्त से सोमवार को सीट पाने वाले छात्र परेशान दिखे। इसमें लिखा है कि बांड भरने के लिए जमीन के कागज देने होंगे। यह भी शर्त है कि उस जमीन पर किसी भी तरह का कोई विवाद या लोन नहीं होना चाहिए। साथ ही, दो गारंटर भी देने होंगे।
शर्त में यह भी बताया गया है कि जमीन का मूल्यांकन सरकार से मान्यता प्राप्त किसी संस्था से होना अनिवार्य है। इस वजह से जिन छात्रों ने जमीन के कागज जमा कर दिए हैं, वह अब परेशान हैं। ज्यादातर को इस बात की चिंता है कि उस जमीन पर पापा ने पहले ही लोन लिया है। ऐसे में वह सस्ती एजुकेशन के इस बांड का लाभ नहीं ले पाएंगे। मामले में एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलसचिव प्रो. विजय जुयाल का कहना है कि बांड की यह शर्तें सरकार ने तय की हैं।
हाल में श्रीनगर मेडिकल कालेज में ऐसा मामला आया, जब प्रतिभू की शर्त पर एक अभ्यर्थी और उसके पिता के आंसू निकल गए। उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति से कर्ज लेकर उन्होंने एक साल की फीस का प्रबंध किया। जमीन उनके पास है नहीं, ऐसे में वह अचल संपत्ति के दस्तावेज कहां से लाएं। हालांकि कुछ स्थानीय लोगों की मदद से उसको दाखिला मिल गया। पूर्व में भी ऐसे मामले आए हैं कि छात्रों के अभिभावकों ने साहूकार से कर्जा लेने के बाद बंधुआ मजदूर के रूप में उसके यहां काम किया है। इसके एवज में साहूकार ने उनको जमीन के कागज दिए।
अन्य राज्यों में नहीं है शर्त
देश के अन्य राज्यों में रियायती शुल्क पर मेडिकल कोर्स कराया जाता है। इसके एवज में वहां भी अनुबंध पत्र भराया जाता है, लेकिन वह प्रतिभू की शर्त नहीं होती है। नाम न बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि प्रतिभू की शर्त के बजाय सरकार अनुबंध तोड़ने वालों के विरुद्ध दूसरी कार्रवाई कर सकती है। मसलन धोखाधड़ी का केस, डिग्री या मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन रद्द कराने की कार्रवाई जा सकती है। जमीन संबंधी शर्त गलत है।
यह शर्त चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के स्तर की नहीं है। शासन से तय हुआ है। मामला मेरी जानकारी में है। इस मुद्दे को शासन में रखा जाएगा। हालांकि संबंधित छात्र रिश्तेदारों की अचल संपत्ति के दस्तावेज जमा कर सकता है।
- डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा