उत्तराखंड क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने छात्र-छात्राओं को पासपोर्ट से जोड़ने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। विदेश मंत्रालय की पहल पर ‘स्टूडेंट कनेक्ट प्रोग्राम’ के तहत यह योजना शुरू की गई है।
विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट कार्यालयों को जारी सर्कुलर में कहा है कि छात्र-छात्राओं को स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम्स, प्रतियोगिताओं, उच्च शिक्षा और व्यापक करिअर की विभिन्न संभावनाओं की तलाश में दूसरे देशों में जाना पड़ता है। इसके लिए पासपोर्ट एक आवश्यक ट्रेवल डाक्यूमेंट है।
साथ ही, आईडी और एड्रेस प्रूफ के रूप में भी पासपोर्ट की व्यापक रूप से स्वीकार्यता है। इसे देखते हुए विदेश मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि देशभर के निजी और सरकारी विश्वविद्यालयों, स्कूल, कॉलेज व अन्य शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययनरत युवाओं को पासपोर्ट बनाने की समुचित सुविधा दी जाए।
विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि अगर किसी शैक्षणिक संस्थान से बड़ी संख्या में युवा पासपोर्ट के लिए आवेदन करते हैं, तो इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों में विशेष शिविर लगाने, पासपोर्ट सेवा केंद्र में विशेष समय देने, बिना अप्वाइंटमेंट के वाक इन प्रोसेस की सुविधाएं दी जाए।
इसलिए भी है फायदेमंद
क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने पिछले लगभग तीन साल में प्रदेश भर में पासपोर्ट शिविर और मेले लगाने के अलावा प्रत्येक दिन के अप्वाइंटमेंट की संख्या बढ़ाई। स्कूल, कॉलेजों और अन्य संस्थाओं के लिए भी अलग से शिविर लगाने की पहल की गई। इसका परिणाम यह हुआ कि जहां पूर्व में 20 दिन से भी अधिक का अप्वाइंटमेंट मिलता था, वहीं अब आनलाइन आवेदन करने के अगले दिन ही बायोमिट्रिक जांच के लिए अप्वाइंटमेंट मिल जाता है।
विदेश मंत्रालय के निर्देश पर दून से इसकी शुरुआत कर दी गई है। निजी और सरकारी विश्वविद्यालयों और शहर के बड़े स्कूल कॉलेज को पत्र भेजे गए हैं। आवेदकों की संख्या और उपलब्धता के आधार पर स्टूडेंट्स को नियमानुसार पासपोर्ट बनाने की सुविधा दी जाएगी।
- विजय शंकर पांडेय, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी