इसके बाद 19 सितंबर को किलिमंजारो चोटी फतह की। इसी चोटी को फतह करने के दौरान सगाई भी कर ली। ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय जोड़े भी बने। ग्लेशियर, दुर्गम और कठिन रास्तों को पार कर अब यह पर्वतारोही की जोड़ी दो दिसंबर को शिव-पावर्ती के विवाहस्थल त्रियुगीनारायण में विवाह बंधन में बंध गई।
अंकित को जहां श्वेता का अपने सपने को पूरा करने का जुनून पसंद आया तो श्वेता को भी ऐसा जीवन साथी चाहिए था जो उसे उसी रूप में स्वीकार करे जैसी वह हैं। इसी के साथ अंकित और श्वेता लोगों के लिए भी प्रेरणा बन गए।