दिल्ली और कोलकाता की तरह रविवार को तड़के देहरादून में चले तेज आंधी-तूफान ने खूब तबाही मचाई।
किसी के हताहत होने की खबर नहीं
सुबह आसमान में अंधेरा छा गया। जिसके बाद गरज के साथ खूब तेज बिजली चमकी और आंधी चली। इस दौरान किसी के हताहत होने की खबर नहीं मिली, लेकिन इस तेज अंधड़ से लोगों को खासा नुकसान हुआ।
छज्जों की किनारे और घर के बाहर खड़े वाहनों को काफी नुकसान हुआ। कहीं-कहीं तो घरों की दीवार भी भरभरा का गिर गई। तूफान और बारिश रुकने के बाद भी देहरादून में बादल छाए रहे।
राज्य मौसम केंद्र शनिवार को ही मौसम में बदलाव होने की चेतावनी दे चुका था।
अभी आंधी-तूफान का खतरा टला नहीं
एनसीआर समेत राजस्थान, हरियाणा व यूपी में अभी आंधी-तूफान का खतरा टला नहीं है। शनिवार शाम को हरियाणा के नारनौल, रेवाड़ी समेत शिमला, जयपुर, अलवर, आगरा, मथुरा, हाथरस और अलीगढ़ में आंधी की जानकारी मौसम विभाग ने दी है।
हालांकि, दिल्ली व एनसीआर इससे बच गया। मौसम विभाग के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, यूपी व राजस्थान में धूल भरी आंधी आएगी।
हालांकि, इसकी स्पीड शुक्रवार के मुकाबले कम रहेगी। शुक्रवार को दिल्ली के सफदरजंग में हवा की रफ्तार 92 किमी प्रतिघंटा और पालम में 115 किमी प्रतिघंटा थी।
मानसून आने के साथ सुधरेगा मौसम
मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि मई व जून में उत्तर-पश्चिम भारत में तूफान आता है, जिसे पंजाब, हरियाणा, यूपी, मध्य प्रदेश और राजस्थान में आंधी कहते हैं।
गर्मी अधिक होती है और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहता है तो इन दोनों की हवा के मेल से 60-80 किमी की स्पीड वाली हवा चलती है। अमूमन 15 अप्रैल से जून के अंत तक ऐसे सिस्टम बनते हैं, लेकिन जगह बदलती रहती है।
इस तरह की आंधी को उत्तर-पूर्व भारत में काल बैसाखी कहते हैं। मानसून आने के साथ ही बार-बार आने वाली इस तरह की आंधी खत्म हो जाती है।