भूमाफिया पर नकेल कसने के लिए गठित होने वाली स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) रियल इस्टेट के क्षेत्र में चर्चा का मुद्दा है। लेकिन क्या एसटीएफ भूमाफिया के इस जाल को तोड़ पाएगी?
घाटी में जमीन के धंधे में अरबों रुपयों का निवेश है। इसमें नेता, अफसर, माफिया और देश की कई बड़ी कंपनियां लगी हैं। सभी को मिलाकर ऐसा गठजोड़ हो गया है जिसकी गांठ खोलना आसान काम नहीं है।
बड़े पैमाने पर हुआ है कब्जा
राजधानी में भूमाफिया ने बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों पर कब्जा करके अवैध प्लाटिंग करा दी है। इसकी शिकायत शासन-प्रशासन से होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती।
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प्रशासनिक अफसर जमीन के मामले में कार्रवाई करने से कतराते हैं। नकरौंदा में ग्राम समाज की जमीन भूमाफिया ने कब्जा रखी है। तहसील की टीमें जांच करने जाती हैं और लौट आती हैं।
कई बड़ी कंपनियों का लगा है पैसा
मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और गुजरात की कई कंपनियों ने यहां रियल इस्टेट में धन लगा रखा है। जिले के छोटे-छोटे भूमाफिया इनके एजेंट बन गए हैं। इन कंपनियों से टास्क फोस कैसे निपटेगी? जिनके एजेंट के रूप में प्रदेश के बड़े नेता और अफसर काम करते हैं।
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इनका मामला सुलटाने के लिए शासन स्तर से दबाव डाला जाता है। रियल इस्टेट के लोगों का कहना है कि टास्क फोर्स में प्रदेश के ही अधिकारी और कर्मचारी तो रहेंगे।