फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dehradun News: एसटीएफ को 20 साल लगे अपना पहला टास्क पूरा करने में

विज्ञापन
विज्ञापन
-वर्ष 2005 में हुआ था एसटीएफ का गठन, सुरेश शर्मा और अंग्रेज सिंह को पकड़ने का मिला था टास्क
विज्ञापन

-वर्ष 2007 में अंग्रेज सिंह को मार गिराया था नागपुर में मगर शर्मा लगातार चल रहा था फरार
माई सिटी रिपोर्टर
देहरादून। उत्तराखंड एसटीएफ ने डीजीसी के हत्यारे सुरेश शर्मा को पकड़कर अपना पहला टास्क पूरा किया है। इस पहले टास्क को पूरा करने में एसटीएफ को 20 साल का इंतजार करना पड़ा। इस बीच कई बार एसटीएफ शर्मा तक पहुंची लेकिन हर बार वह चकमा देने में सफल रहा।

दरअसल, वर्ष 2000 में उत्तराखंड बनने के बाद पुलिस के सामने कई चुनौतियां थी। उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद ज्यादातर पुलिस के मजबूत विंग और तकनीकी रूप से उन्नत टीमें उत्तर प्रदेश के पास ही थीं। जबकि नई पुलिस के पास चुनौतियां यूपी के जैसी ही थी। हरिद्वार, देहरादून और उद्यमसिंहनगर ऐसे जिले थे जहां गंगवार भी होती थी और बड़े अपराध भी। ऐसे में पुलिस लगातार अपने को उन्नत करने का प्रयास कर रही थी। इसी बीच वर्ष 2005 में उत्तराखंड पुलिस को भी एक ऐसी फोर्स की जरूरत महसूस हुई जो तकनीकी रूप से उन्नत हो और जिला पुलिस को अपराधियों को पकड़ने में मदद मिल सके।
विज्ञापन


कुछ समय पहले ही कई डकैतियों को अंजाम देने वाला अंग्रेज सिंह अपने साथियों के साथ जेल से भाग गया था। उसे पकड़ना भी किसी चुनौती से कम नहीं था। इसके बाद 2005 में उत्तराखंड सरकार ने भी एसटीएफ के गठन विचार किया और इसे इसी वर्ष अंतिम रूप दिया गया। उत्तर प्रदेश में 1997 में एसटीएफ का गठन किया गया था। उस वक्त के कई पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इस टीम का भी हिस्सा रहे थे। ऐसे में यहां एसटीएफ का गठन कर काम शुरू किया गया। एसटीएफ को सबसे पहला लक्ष्य अंग्रेज सिंह और सुरेश शर्मा को ही पकड़ने का मिला था। एसटीएफ और हरिद्वार पुलिस ने वर्ष 2007 में अंग्रेज सिंह को नागपुर में पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया था। लेकिन शर्मा फरार चल रहा था।
विज्ञापन

-----
2021 हाथ से निकल गया था शर्मा
शर्मा के बारे में एसटीएफ ने कई बार सूचनाएं इकट्ठा की। लेकिन कोई न कोई अड़चन आ जाती थी। इसी दरम्यान 2021 में एसटीएफ लगभग शर्मा के करीब पहुंच गई थी। मगर उस वक्त अचानक से उसने अपना ठिकाना बदल लिया। कोई पुष्टि ना होने पर वह पकड़ में नहीं आ सका।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें