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Dehradun News: म्यांमार कनेक्शन में एसटीएफ ने देहरादून से दो साइबर ठग पकड़े

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म्यांमार में साइबर ठगी के कनेक्शन में एसटीएफ ने देहरादून से दो साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी ऊधमसिंह नगर के रहने वाले हैं। ये लोग ठगी की रकम को लेने के लिए भारत में कार्पोरेट बैंक खाते खुलवाते थे। इनमें रकम लेने के बाद इसे क्रिप्टो करेंसी के रूप में फिर से विदेशों में ट्रांसफर करते थे। इसके लिए इन्हें एक प्रतिशत कमीशन मिलता था। आरोपियों ने अब तक 120 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम भारतीय खातों में जमा कराई है। इसका उन्हें करीब सवा करोड़ रुपये कमीशन मिला है।







एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि इसी माह भारत सरकार म्यांमार से 540 भारतीय नागरिकों को स्वदेश वापस लाई थी। इनमें से 22 नागरिक उत्तराखंड के हैं। इनकी जांच-पड़ताल के लिए एसटीएफ ने एक विशेष टीम का गठन किया था। इसी क्रम में सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों के माध्यम से उत्तराखंड में म्यांमार कनेक्शन का पता चला। जांच में आया कि कुछ लोग उत्तराखंड में रहकर म्यांमार व अन्य देशों में हो रही साइबर ठगी से जुड़े हुए हैं। इस पर 20 मार्च को देहरादून साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन और कुमाऊं साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दो मुकदमे दर्ज किए गए। जांच के लिए इंस्पेक्टर एनके भट्ट और विपिन बहुगुणा की टीम को लगाया गया। इस बीच दो लोगों की लोकेशन देहरादून में होने की जानकारी मिली। एसटीएफ की इस टीम ने थानो मार्ग पर जिला पंचायत चुंगी के पास एक कार को रोका। इस कार में ऊधमसिंह नगर के दिनेशपुर निवासी हरजिंद्र सिंह और अर्जुनपुर निवासी संदीप सिंह को पकड़ा गया।
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इनके पास से एक लैपटॉप, सात मोबाइल फोन, एक पासपोर्ट, दो चेकबुक, तीन डेबिट कार्ड, दो पैन कार्ड, एक पासबुक और शुभम इंटरप्राइजेज के नाम से मोहर लगे चार एसबीआई बैंक के कार्पोरेट बैंक खाते के फॉर्म बरामद हुए। एसएसपी ने आरोपियों से पूछताछ के आधार पर बताया कि दोनों एक दूसरे को लंबे समय से जानते हैं। वे टेलीग्राम के माध्यम से साइबर अपराधियों के संपर्क में आए थे। उनके कहने पर लोगों के कॉर्पोरेट बैंक अकाउंट खुलवाते थे। इनकी चेकबुक, पासबुक, इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड आदि अपने पास रख लेते थे। इन बैंक खातों को एक्स हेल्पर एप से लिंक किया जाता था। इसके बाद मैसेज फॉरवर्ड एप के माध्यम से ओटीपी लिंक नंबर पर भेज दिए जाते थे। इस तरह इन अकाउंट में भारत और विदेशों में ठगी जा रही रकम को ट्रांसफर कराते थे। कुल जमा रकम का एक प्रतिशत कमीशन के रूप में इन्हें यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी के रूप में ट्रस्ट वॉलेट के माध्यम से मिलता था। कमीशन में मिले यूएसडीटी को टेलीग्राम पर मौजूद कुछ क्रिप्टो दलालों के माध्यम से सस्ते में बेचकर भारतीय रुपयों में बदलवा दिया जाता था।



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मार्च में ही निकाले 25 लाख रुपये



आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि अब तक वे 120 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम अपने इन खातों में जमा करा चुके हैं। इसका उन्हें एक प्रतिशत के हिसाब से करीब सवा करोड़ रुपये मिला है। इसमें से 25 लाख रुपये तो आरोपियों ने इसी माह अपने खातों से निकाला है। एसटीएफ के अनुसार इनके मोबाइल के ट्रस्ट वॉलेट में अब भी लाखों रुपये के यूएसडीटी जमा हैं।







इस तरह खुलवाते हैं खाते



ये लोग अपने परिचितों को बताते हैं कि वह एक गेमिंग एप से जुड़े हुए हैं। इस एप से करोड़ों रुपये आता है। लेकिन, यह रकम केवल करंट अकाउंट में आ सकती है। इसके लिए वे अपने परिचितों के फर्म बनवाते हैं। इस फर्म के बूते सभी दस्तावेज लेकर बैंकों में कॉर्पोरेट करंट अकाउंट खुलवाते हैं। इसके बाद इनका रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, चेक व पासबुक आदि ले लिए जाते हैं। एसटीएफ को आरोपियों के खुलवाए 20 करंट अकाउंट की जानकारी मिली है। इनकी भी जांच की जा रही है।
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10वीं पास है संदीप, मलेशिया में दे चुका है ट्रेनिंग



आरोपियों में से संदीप 10वीं पास है, लेकिन वह इस तरह के अकाउंट खुलवाने में माहिर है। ऐसे में साइबर अपराधियों ने उसे पिछले साल जून में मलेशिया बुलाया था। वहां पर उसने कुछ साइबर अपराधियों को इस तरह के अकाउंट खोलने का प्रशिक्षण दिया था। एसएसपी ने बताया कि इनके हवाला ऑपरेटरों की जानकारी भी मिली है। मुकदमों में इन्हें भी शामिल करते हुए जांच की जा रही है।
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