सुप्रीम कोर्ट ने अपर सचिव जेपी जोशी प्रकरण और उससे जुड़े ब्लैकमेलिंग केस की प्रोसीडिंग पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से चार सप्ताह की अवधि में जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी संजय बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है। याचिकाकर्ता ने केस से जुड़ी सुनवाई उत्तराखंड से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की है।
तीन साल पहले एक महिला ने तत्कालीन अपर सचिव गृह जेपी जोशी पर नौकरी दिलाने के नाम पर दुराचार किए जाने का आरोप लगाते हुए दिल्ली में मुकदमा दर्ज कराया था।
जमानत पर हैं जोशी
दिल्ली पुलिस ने जीरो अपराध संख्या पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना दून पुलिस को स्थानांतरित कर दी। इसी बीच जेपी जोशी ने महिला और उसके साथियों के खिलाफ अश्लील सीडी का डर दिखाकर ब्लैकमेलिंग करने का आरोप लगाया था। इसमें संजय बनर्जी भी आरोपी था। इस मामले में अपर सचिव जेपी जोशी फिलहाल जमानत पर हैं।
जेपी जोशी के खिलाफ दुराचार और ब्लैकमेलिंग का दूसरा मुकदमा दून की अदालत में विचाराधीन है। ब्लैकमेलिंग में आरोपी संजय बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मुकदमे को दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग उठाई है। याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड में पुलिस और सरकारी मशीनरी अपर सचिव जेपी जोशी से ग्रसित हैं। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों मुकदमों की प्रोसिडिंग पर स्टे कर दिया है।