राजकीय शिक्षक संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी में कमल किशोर डिमरी को अध्यक्ष और डा. सोहन सिंह माझिला को महामंत्री चुना गया गया है। कोषाध्यक्ष पद पर अनुज चौधरी, उपाध्यक्ष पद पर मुकेश प्रसाद बहुगुणा और संयुक्त मंत्री पद पर योगेश चंद्र घिल्डियाल ने जीत हासिल की है।
लक्ष्मण विद्यालय में प्रांतीय कार्यकारिणी के निर्वाचन के लिए बृहस्पतिवार सुबह 8:30 बजे से मतदान प्रक्रिया शुरू हुई। दोपहर दो बजे तक हुए मतदान में कुल 2895 डेलिगेट्स ने वोट डाले। इसके बाद मुख्य चुनाव अधिकारी अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा महावीर बिष्ट ने परिणामों की घोषणा की।
अध्यक्ष पद पर विजेता कमल किशोर डिमरी को 896 वोट मिले। उपविजेता रहे निवर्तमान अध्यक्ष राम सिंह चौहान को 542, शिव सिंह नेगी को 429, सोहन सिंह मेहता को 378, भीम सिंह को 299, राजकुमार चौधरी को 217 और डा. चंडी प्रसाद घिल्डियाल को 120 वोट मिले। महामंत्री पद पर डा. सोहन सिंह माझिला को 1415 वोट मिले।
दूसरे स्थान पर रहे रमेश पैन्यूली को 1246 और अंतिम स्थान पर रहे देवेंद्र सिंह रावत को 212 वोट मिले। कोषाध्यक्ष पद पर विजेता अनुज चौधरी को 646, दूसरे स्थान पर रहे विनय थपलियाल को 609, जगमोहन सिंह कठैत को 516, गनेश चंद्र पाठक को 418, जीतपाल सिंह रमोला को 356, राजेंद्र सिंह नेगी को 205 और श्रीकृष्ण सेमवाल को 100 मत मिले।
बड़ी संख्या में मिले अवैध मत
उपाध्यक्ष पद पर विजेता मुकेश बहुगुणा को 991, विजयपाल सिंह को 570, माधो सिंह बिष्ट को 512, राजेश्वरी सेमवाल को 305, कुलदीप सिंह सैनी को 272, इंदिरा मेहरा को 174 और हरेंद्र सिंह गुसाईं को 49 वोट मिले।
संयुक्त मंत्री पद पर विजेता योगेश चंद्र घिल्डियाल को 554, धीरेंद्र सिंह रावत को 468, प्रकाश सिंह भंडारी को 364, डा. सुरेश चंद्र भट्ट को 354, सुधीर चंद्र नौटियाल को 287, मक्खन लाल शाह को 256, निशा खत्री राणा को 236, अरुण थपलियाल को 193, संजय गैरोला को 96 और नवाब अली को 68 वोट मिले।
बड़ी संख्या में मिले अवैध मत
चुनाव में भी बड़ी संख्या में मत अवैध पाए गए। शिक्षक प्रतिनिधियों को बैलेट पेपर पर अपने पसंदीदा प्रत्याशी के सामने सही का निशान लगाना था। बड़ी संख्या में शिक्षकों ने वोट डालने में गड़बड़ियां की। इसके चलते उनके मत को अवैध घोषित किया गया। अध्यक्ष पद पर 14, महामंत्री पद पर 23, संयुक्त मंत्री पद पर 21, उपाध्यक्ष पद पर 24 और कोषाध्यक्ष पद पर सबसे अधिक 45 मत अवैध पाए गए।
नोटा का भी किया इस्तेमाल
चुनाव में यूं तो नोटा का विकल्प नहीं दिया गया था, लेकिन शिक्षक प्रतिनिधियों ने अपने स्तर से इसका इस्तेमाल किया। काफी मतदाताओं ने बैलेट पेपर पर नोटा लिखा हुआ था। मतगणना के दौरान ऐसे कई मत-पत्र पाए गए, जिसमें मतदाताओं ने सभी प्रत्याशियों को अस्वीकार कर दिया। चुनाव अधिकारियों ने ऐसे सभी वोटों को रद्द कर दिया।