मुख्यमंत्री कार्यालय के एक लोक सूचना अधिकारी (पीआईओ) ने राज्य सूचना आयुक्त पर पूर्वाग्रह से ग्रसित होने का आरोप जड़ दिया। पीआईओ ने मामले की सुनवाई आयुक्त से हटाकर मुख्य सूचना आयुक्त से कराने का आग्रह किया है।
मामला राज्य सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल की कोर्ट का है।
सीएम ऑफिस को सूचना देने को कहा
दून निवासी जयपाल सिंह ने समाज कल्याण विभाग से सूचना मांगी थी। सूचना न मिलने पर मामला आयोग पहुंच गया। आयुक्त ने सुनवाई करते हुए सीएम ऑफिस को सूचना देने को कहा। इस पर पीआईओ गिरीश डालाकोटी ने आयोग को पत्र भेजकर आयुक्त नौटियाल पर सीएम कार्यालय के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित होने का आरोप लगा दिया।
सूचना आयुक्त नौटियाल ने कहा कि पीआईओ ने न तो खुद सूचना दी और न ही किसी की मदद से सूचना उपलब्ध कराई। आयुक्त ने आरोप पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह आयुक्त और आयोग की छवि को नुकसान पहुंचाने के समान है। आयुक्त ने डालाकोटी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सुनवाई की अगली तारीख पर स्वयं कोर्ट में हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने को कहा है। साथ ही दस हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी गई है।
नई नियमावली में आयोग की हदबंदी
शासन ने आरटीआई की नई नियमावली संशोधन तो किया है, पर फिर भी कसर बाकी रह गई। इस संशोधित नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि आयोग को द्वितीय अपील का निस्तारण 90 से 120 दिन के अंदर करना होगा। आयोग इस प्रावधान को आयोग के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण मान रहा है।
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