उत्तराखंड की नजूल नीति जल्द ही बदलने जा रही है। हरीश रावत सरकार के जमाने में शुरू की गई कवायद को अब बीजेपी सरकार अंजाम तक पहुंचाने में जुट गई है।
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पूर्ववर्ती सरकार ने नई नजूल नीति का ड्राफ्ट तैयार कराया था, लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं कर पाई थी। बीजेपी सरकार भी महसूस कर रही है कि 2009 में लागू नजूल नीति सात साल के भीतर बहुत प्रभावी नहीं रही है। 90 साल के लिए नजूल भूमि के जितने पट्टे दिए गए थे, उनमें से ज्यादातर की मियाद खत्म हो चुकी है और उस पर लोगों या संस्थाओं के अवैध कब्जे हैं।
न उन्हें फ्री-होल्ड कराया जा रहा है और न ही कब्जे छोडे़ जा रहे हैं। इसलिए कई नए प्रावधानों के साथ नई नजूल नीति को लाने की सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। सरकार का मानना है कि नई नजूल नीति आने के बाद फायदा उसे होगा, न कि अवैध कब्जेदारों को। नई नजूल नीति के ड्राफ्ट को अब आवास विभाग की ओर से कैबिनेट में लाने की तैयारी है।
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हालांकि वित्त विभाग और आवास विभाग के बीच कुछ एक बिंदुओं को लेकर असहमति है। वित्त विभाग ज्यादा राजस्व को ध्यान में रख रहा है, तो आवास विभाग का जोर व्यवहारिक पक्ष पर है।
इन सिफारिशों पर होना है फैसला
त्रिवेंद्र सिंह रावत
- नजूल भूमि फ्री-होल्ड करने के लिए 31 अक्टूबर 2005 के सर्किल रेट प्रस्तावित
- आवासीय भूमि पर 31 अक्टूबर 2005 के प्रचलित सर्किल रेट का 50 प्रतिशत
- अनावसीय भूमि पर 31 अक्टूबर 2005 के प्रचलित सर्किल रेट का 75 प्रतिशत
- अवैध, अनधिकृत नजूल भूमि पर 100 वर्ग मी. क्षेत्र को 2005 के सर्किल रेट के
125 प्रतिशत, 100 वर्ग मी.के व्यवसायिक मामलों में 150 प्रतिशत तथा 100
वर्ग मी से अधिक आवासीय मामलों में 150 प्रतिशत तथा व्यवसायिक मामलों में
180 प्रतिशत मूल्य पर फ्री-होल्ड किया जाना प्रस्तावित।
- एससी, एसटी, ओबीसी और बीपीएल श्रेणी की नजूल भूमि पर काबिज आवेदकों
को फ्री-होल्ड करने पर 20 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट प्रस्तावित।
- नजूल भूमि पर काबिज बीपीएल श्रेणी के आवेदकों को 50 वर्ग मी. तक नि:शुल्क
फ्री-होल्ड की सुविधा प्रदान की जाएगी।
- प्राइवेट स्कूलों, नर्सिंग होम, हॉस्पिटल और सार्वजनिक संस्थाओं की नजूल भूमि को
फ्री-होल्ड किया जाना आवश्यक होगा।
- कृषि और बागवानी के आवंटित पट्टे, जिनका मौजूदा उपयोग अन्य कार्यों के लिए
हो रहा है, उन का उक्त स्थान के मास्टर प्लान लैंड यूज के अनुसार फ्री-होल्ड की
कार्रवाई की जाएगी।
2,41,97,186
वर्ग मीटर नजूल जमीन उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में है
90
वर्ष के लिए दी गई थी 1900 से 1920 के बीच ये भूमि
30
वर्ष के अंतराल में होना था नजूल पट्टों का नवीनीकरण
2009
की नजूल नीति इस वक्त उत्तराखंड राज्य में लागू है
2000
के सर्किल रेट पर वर्तमान में नजूल भूमि होती है फ्री-होल्ड
12,000
करोड़ का राजस्व संभव 2005 के सर्किल रेट लागू होने से
प्रस्तावित नजूल नीति में ये संशोधन प्रस्तावित
- नजूल नीति 2016 में भू-उपयोग श्रेणियां निर्धारित नहीं की गई थीं। अब ये श्रेणियां प्रस्तावित हैं।
1-आवासीय:एकल आवासीय, ग्रुप हाउसिंग, बहुमंजिलें आवासीय भवन।
2-अनावसीय: औद्योगिक, विद्यालय व शैक्षणिक संस्थाएं, चिकित्सालय, नर्सिंग होम, कार्यालय,
यातायात, व्यावसायिक।
-नजूल भूमि फ्री-होल्ड पात्रता श्रेणी में वर्तमान नजूल नीति में केवल केंद्र के सेवा विभागों जैसे
रेलवे, पोस्ट ऑफिस को छोड़कर अन्य प्राविधान पूर्ववर्त रखे गए हैं।
- पट्टे की शर्तों के उल्लंघन पर वर्तमान में प्रचलित नजूल नीति नियम-16 में दंडात्मक परिर्वतन
शुल्क दोगुना लेने का प्रावधान था। अब उसके स्थान पर नजूल भूमि के अनुमन्य मौजूदा
भू-उपयोग के अनुसार शुल्क लिया जाना प्रस्तावित है।
- ऐसी नजूल भूमि या उस पर बना भवन प्रशासनिक दृष्टि से अहम स्थानों के समीप हो, जिसकी
सार्वजनिक उपयोगिता की संभावना हो और वहां पर अवैध कब्जेदारों की उपस्थिति बनी हो, उसे
किसी भी स्थिति में फ्री-होल्ड नहीं किया जाएगा।
- यदि पट्टे की अवधि समाप्त नहीं हुई हो, तो फ्री होल्ड स्वैच्छिक होगा।
- ऐसी नजूल भूमि, जो निर्बाध रूप से रिक्त पड़ी हो और जिसका कोई पट्टा नहीं है, को शासन
के स्तर पर आरक्षित मूल्य पर नीलाम किया जाएगा।
- प्रस्तावित नजूल नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जनपद स्तरीय अनुश्रवण समिति और राज्य
स्तर पर राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति गठन किया जाना प्रस्तावित किया गया है।
आवास मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि 2009 की नजूल नीति बहुत प्रभावी नहीं रही है। लोगों ने न तो जमीन फ्री होल्ड कराई है और न ही जमीन सरकार को वापस की है। ये स्थिति राज्य हित में नहीं है। हम नई नजूल नीति को ला रहे हैं, ताकि राज्य को राजस्व मिले या फिर उसकी नजूल भूमि उसके हाथ में आए। ताकि विकास के कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।