देहरादून शहरवासियों को अपने घर का सपना दिखाकर सरकार भूल गई। याद रहा, तो सिर्फ श्रेय लूटना। बीजेपी ने प्रधानमंत्री आवास योजना पर बढ़-चढ़कर बातें कीं, तो कांग्रेस की राज्य सरकार ने तो केंद्र की योजना पर अपना चोला चढ़ाकर इसका नाम ही बदल डाला।
जहां तक सवाल आम आदमी का है, उसे न प्रधानमंत्री आवास योजना से फायदा पहुंचा, न ही जन आवास योजना उसके काम आई। डेढ़ साल पुरानी इस योजना की अब तक की स्थिति पर नजर डालें, तो बेहद शर्मनाक तस्वीर उभरती है।
सरकार ने नहीं दिखाई दिलचस्पी
trivendra singh rawat
पूरे उत्तराखंड में इस योजना के लिए सिर्फ नौ लोगों को बैंकों से लोन मिल पाया है। आवास एवं शहरी विकास निगम यानी हडको सब्सिडी के तौर पर इन नौ लोगों के लिए सिर्फ सात लाख रुपये ही रिलीज कर पाया है।
दरअसल, बैंकों ने शुरू से इस योजना में कोई दिलचस्पी नहीं ली है। सरकार ने आम आदमी के हित में न तो इसका प्रचार करना मुनासिब समझा और न ही बैंकों पर दबाव बनाना। नतीजा ये हुआ, कि इस योजना के लिए बैंकों तक लोग पहुंचे ही नहीं। बैंकों के सामने हडको कई बार अपनी चिंता जाहिर कर चुका है।
इन स्थितियों के बीच, योजना में अच्छा रिस्पांस आने की उम्मीद जगी है। इसका मुख्य कारण ये है कि केंद्र सरकार ने इसका दायरा बढ़ा दिया है। अब ज्यादा आय वर्ग के लोग भी इस योजना में कवर हो रहे हैं। हडको के क्षेत्रीय प्रमुख सुधीर भटनागर के अनुसार, योजना में मध्यम आर्य वर्ग के लोगों के लिए संभावना के ज्यादा रास्ते खोल दिए गए हैं। इसके बाद, उम्मीद है कि इस साल से योजना रफ्तार पकड़ लेगी।
ये है आवास योजना
प्रतीकात्मक तस्वीर
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यह योजना शुरू में निम्न आय वर्ग के लिए प्लान की गई थी, लेकिन 2017 से इसमें मध्यम आय वर्ग यानी एमआईजी को भी शामिल कर लिया गया है। योजना के कई कंपोनेंट रखे गए हैं। मलिन बस्तियों के लिए अलग योजना है। इसके अलावा पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में भी योजना चलेगी, जिसमें घर बनाकर नगर निकायों के माध्यम से लोगों को दिए जाएंगे।
बने बनाए घर या अपनी जमीन पर घर बनाने के लिए लोन से संबंधित योजना भी है, जिसके लिए नोडल एजेंसी हडको को बनाया गया है। इस कंपोनेंट का नाम क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम रखा गया है। इस योजना के तहत प्रार्थी बैंकों में लोन के लिए आवेदन करेगा।
बैंक अपनी शर्तों के हिसाब से लोन प्रदान करेगा और इसमें सब्सिडी का जो पार्ट है, उसका भुगतान हडको करेगा। आवेदन वो ही कर सकता है, जिसका पूरे भारत वर्ष में अपने नाम पर कोई घर न हो। सरकारी कार्मिक भी योजना का लाभ ले सकता है।