जिन कारगिल शहीदों के नाम सरकार शौर्य दिवस मनाने जा रही है, उनका परिवार ही गुमनामी के अंधेरे में खोता जा रहा है। एक शहीद के परिजन पिछले आठ वर्षों से शौर्य दिवस जैसे आयोजनों में खुद को शामिल करने और शहीद को सम्मान देने का अनुरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार और सैनिक कल्याण से जुड़े विभाग उन्हें कोरा आश्वासन देकर टरका रहे हैं। परिवार का आरोप है कि कारगिल युद्ध के समय की गई एक भी घोषणा आज तक सरकार ने पूरी नहीं की है।
मामला गैंरसैण निवासी कारगिल शहीद स्व. रणजीत सिंह के परिवार से जुड़ा है। 30 जून 1999 को गैरसैंण, चमोली के बासीसैंण, अक्सवाड़ा निवासी 24 वर्षीय राइफलमैन रणजीत सिंह कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना से लोहा लेते हुए शहीद हो गए।
सरकार ने उनके सम्मान में दाडिमडाली से अक्सवाड़ा होते हुए रोडिया में नागचूला से मिलने वाली सड़क और राजकीय इंटर कॉलेज रोडिया का नामकरण करने की घोषणा की। साथ ही शहीद के परिवार को पेट्रोल पंप आवंटित करने की भी घोषणा की। लेकिन 18 वर्ष बाद भी घोषणाएं पूरी नहीं हुईं।