राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद में अर्हता का मापदंड लागू हुआ, तो शिक्षक ही नहीं बल्कि अधिकांश अफसर भी बाहर होंगे। केंद्र की गाइड लाइन के अनुसार परिषद में डीन, एसोसिएट एवं असिस्टेंट प्रोफेसरों के पद सृजित हैं, लेकिन सेवा नियमावली न बनने से यहां पुरानी व्यवस्था पर काम चल रहा है। वित्त विभाग की एक रिपोर्ट के बाद अब शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने विभागीय अफसरों को अर्हता न रखने वाले शिक्षकों को यहां से हटाने के निर्देश दिए हैं।
एससीईआरटी में केंद्र के दिशा निर्देश एवं सुझाव पर वर्ष 2013 में पदों का सृजन किया गया था। जिसमें डीन का एक, प्रोफेसर के चार, अपर निदेशक का एक, एसोसिएट प्रोफेसर के 13, असिस्टेंट प्रोफेसर के 22, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी का एक, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष का एक, प्रवक्ता के दो, लेखाकार के छह, अनुभाग अधिकारी का एक, कंप्यूटर सहायक का एक, सैमी प्रोफेशनल असिस्टेंट के दस, कार्यानुभाव शिक्षक के तीन, प्रयोगशाला सहायक दो, जूनियर प्रोजेक्ट फैलो के छह सहित यहां विभिन्न 108 पद सृजित किए गए, लेकिन विभाग की ओर से सेवा नियमावली न बनाए जाने से मामला लटका हुआ है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक विभाग ने नियमावली बनाने के बजाए शासन में अलग से नए ढांचे का प्रस्ताव भेजा। समय-समय पर अलग-अलग तरीके से कई बार इस तरह के प्रस्ताव भेजे जाते रहे। जिसे शासन ने निरस्त कर दिया।
तो केंद्र सरकार वहन करती व्ययभार
केंद्र की गाइड लाइन के अनुरूप सृजित पदों पर प्रोफेसरों एवं असिस्टेंट प्रोफेसरों की तैनाती होती, तो इनका वेतन और प्रशिक्षण मद में हर साल व्यय होने वाली आठ से दस करोड़ की धनराशि केंद्र सरकार वहन करती, लेकिन इनके स्थान पर विभागीय अधिकारियों की तैनाती से वर्तमान में यहां तैनात शिक्षकों एवं विभागीय अधिकारियों के वेतन को प्रदेश सरकार वहन कर रही है।
वर्तमान में विभाग के ये अधिकारी हैं कार्यरत
एससीईआरटी में वर्तमान में अपर निदेशक एक, संयुक्त निदेशक तीन, उप निदेशक आठ, सहायक निदेशक 12 व 48 प्रवक्ता कार्यरत हैं। जबकि केंद्र की गाइड लाइन के अनुरूप पदों के सृजन के दौरान इन पदों को समर्पित कर दिया गया था।
एनसीईआरटी को वर्ष 2013 में नरेंद्र नगर से देहरादून इस शर्त पर लाया गया कि यहां केंद्र सरकार के दिशा निर्देश पर अमल किया जाएगा, मामले के कैबिनेट में आने के बाद इसका शासनादेश भी हुआ, लेकिन उस पर अमल न कर यहां पहुंच वाले शिक्षकों एवं अफसरों की तैनाती होती रही है। इससे नुकसान यह हुआ कि जिस उद्देश्य से संस्थान बना है वह पूरा नहीं हो पा रहा है। वही केंद्र से पर्याप्त बजट नहीं मिल पा रहा है।
- संतोष कुमार शील, पूर्व अपर शिक्षा निदेशक एससीईआरटी
एससीईआरटी में न केवल शिक्षकों के मामले में बल्कि अधिकारियों के मामले में भी शैक्षिक अर्हता को लागू किया जाएगा, यदि अधिकारी अर्हता पूरी नहीं कर रहे तो उन्हें भी हटाया जाएगा।
- रणजीत सिन्हा, प्रभारी शिक्षा सचिव