राज्य स्तरीय विद्यालयी खेलों में फर्राटा दौड़ में राज्य चैंपियन रही रूपा को स्पोर्ट्स कॉलेज में एडमिशन नहीं मिलेगा। भारतीय मूल की नहीं होने के कारण उसका स्पोर्ट्स कॉलेज में पढ़ने और खेल में नाम कमाकर दुनिया में छाने का सपना पूरा नहीं हो सकेगा।
प्रशासन और खेल विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि, वह छात्रा की कोई मदद नहीं कर सकते हैं।
राज्य चैंपियन रही है रूपा
विकासखंड के भकुंडा में पिछले कई वर्षो से रह रहे नेपाली मजदूर दीपक कुमार की कक्षा 8 में पढ़ने वाली बेटी रूपा दौड़ में राज्य चैंपियन रह चुकी है। छात्रा ने इस उपलब्धि से चमोली ही नहीं वरना प्रदेश का नाम भी रोशन किया था।
रूपा खेलों को करियर बनाना चाहती है। करियर बनाने के लिए वह अगस्त्यमुनि स्थित बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रवेश चाहती है। लेकिन उसका यह सपना पूरा होने की उम्मीद बहुत कम है।
कॉलेज में प्रवेश के लिए मूल निवास प्रमाणपत्र की बाध्यता होने के कारण वह प्रवेश प्रक्रिया से बाहर हो जाएगी।
दूसरे वर्ष भी बनी थी चैंपियन
बीते वर्ष नवंबर में हरिद्वार में संपन्न हुई राज्य स्तरीय विद्यालयी खेलों में 13.13 सेकंड में 100 मीटर दौड़ पूरी कर रूपा ने नया रिकार्ड बनाया था।
फर्राटा चैंपियन इस छात्रा ने लगातार दूसरे वर्ष 200 और 400 मीटर दौड़ में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
अधिकारियों का है कहना
अगस्त्यमुनि बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रवेश के लिए अप्रैल में ट्रायल होना है। कॉलेज में रूपा के प्रवेश के लिए जब जानकारी ली तो पता चला कि ट्रायल सहित जरूरी औपचारिकता पूरी करने के साथ मूल निवास प्रमाणपत्र होना जरूरी है। रूपा का मूल निवास प्रमाणपत्र बन नहीं सकता। खेल मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री को भी छात्रा की स्थिति के बारे में अवगत करा चुका हूं, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
-सुरेंद्र थापा, निदेशक सार्थक फाउंडेशन
छात्रा के पिता के नाम अगर कुछ जमीन भी होती, तो कुछ उम्मीद बन सकती थी। लेकिन अभी तक एक भी ऐसा कागज नहीं मिला है, जो रूपा के लिए लाभकारी हो।
-केएन गैरोला, जिला खेल अधिकारी चमोली