डॉ. यूएस रावत को दोबारा श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्ति किया गया है। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने विवि की स्थापना साकार कर लाखों छात्रों का भविष्य संवारा। संसाधनों के अभाव और कम खर्च में साढ़े तीन साल तक उन्होंने सफलतापूर्वक शैक्षणिक गतिविधियों को संचालित किया। इस दौरान विश्वविद्यालय को 35 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ। दोबारा कुलपति नियुक्त होने के बाद मंगलवार को डॉ. रावत ने अमर उजाला पहुंचकर भविष्य की रणनीति पर खास बातचीत की। पेश हैं उनसे बातचीत के कुछ अंश।
सवाल : दोबारा कुलपति बनने के बाद सबसे पहली प्राथमिकता क्या होगी?
जवाब : सरकार ने हमें दून में कैंपस बनाने के लिए दो एकड़ जमीन दी है। हमारी अब पहली प्राथमिकता यहां कैंपस का निर्माण कर जल्द से जल्द पढ़ाई शुरू कराना है। इसके लिए तेजी से काम किया जाएगा।
सवाल : विवि अब अगले सत्र से प्राइवेट परीक्षाएं नहीं कराएगा। ऐसे में आर्थिक संकट से कैसे निपटेंगे?
जवाब : यह चिंता की बात तो है, लेकिन हमारे पास इसके बाद भी दस हजार से ज्यादा छात्र रहेंगे। हम कुछ और कोर्सेज शुरू करने जा रहे हैं जो कि प्रदेश में पहले होंगे। निश्चित तौर पर इससे भी राजस्व की बढ़ोतरी होगी।
सवाल : नए कोर्सेज कौन से होंगे, जिससे युवा जुड़ सकेंगे?
जवाब : हम अब वाटर एंड एडवेंचर स्पोर्ट्स में नई शुरुआत करना चाहते हैं। इसके लिए कुछ योजना बनाई जा चुकी है। जैसे ही शासन से अनुमति मिलेगी तो हम इसमें काम शुरू कर देंगे। इसमें छात्रों के लिए संभावनाएं भी अपार हैं।
सवाल : विवि की स्थापना को तीन साल से ऊपर का समय हो गया है, लेकिन अभी तक पूरा सिलेबस नहीं बन पाया है?
जवाब : हमने कई कोर्सेज का खुद का सिलेबस तैयार कर दिया है। अन्य कोर्सेज पर भी काम चल रहा है। उम्मीद है कि नए सत्र से छात्र श्रीदेव सुमन विवि का अलग सिलेबस ही पढ़ेंगे।
सवाल : राज्यपाल ने शिक्षा की गुणवत्ता के लिए बेस्ट यूनिवर्सिटी अवार्ड जैसी शुरुआत की है। आप कैसे तैयारी करेंगे?
जवाब : हमारा मकसद विवि को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाना है। रिसर्च पर खास फोकस करेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छा हो जाएगा तो पूरी उम्मीद है कि हमें भी माननीय राज्यपाल के हाथों से अवार्ड मिलेगा।
सवाल : इस साल विवि सवा लाख से ऊपर छात्रों की प्राइवेट परीक्षाएं करा रहा है। अपने कॉलेज न होने के बावजूद व्यवस्था की चुनौतियों से कैसे निपटते हैं?
जवाब : जब हमने प्राइवेट परीक्षाओं की शुरुआत की थी, तब हमारे पास कॉलेज नहीं थे। हम गढ़वाल विवि के कॉलेजों से ही तालमेल बनाकर अपने परीक्षा केंद्र बनाते थे। आज हमारे पास 146 प्राइवेट कॉलेज, 28 बीएड कॉलेज हैं और जल्द ही 56 कॉलेज तकनीकी विवि से भी हमारे पास आने वाले हैं। अब परेशानियां कम हो गई हैं।