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शिक्षा मंत्री ने यौन शोषण मामले को दिया इमोशन टच, पीड़ितों के ही पाले में डाली गेंद

Thu, 28 Dec 2017 10:45 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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arvind pandey - फोटो : file photo
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महिला खिलाड़ियों के यौन शोषण के सुबूतों के आधार पर खेल संघों के पदाधिकारियों के खिलाफ बलात्कार जैसे संगीन अपराध के आरोप लगाने वाले शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने पैंतरा बदल दिया।
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अपनी बेबाक बयानबाजी से हटकर अब उन्होंने इस पूरे मामले को इमोशनल टच दिया है। सुबूत होने के बावजूद शोषण के आरोपियों को बचाने के आरोप पर वे खुद अपना बचाव करते नजर आए। शिक्षा मंत्री ने कहा कि वे किसी के साथ हुई शर्मनाक घटना को सार्वजनिक करके उसके परिवार को तोड़ने का काम नहीं करेंगे। 

शिक्षा मंत्री द्वारा बीते दिनों महिला खिलाड़ियों के यौन शोषण के सुबूत होने के बयान को लेकर राज्य में सियासी तूफान खड़ा हो गया है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को लेकर हमले कर रहा है। शिक्षा मंत्री से सुबूत सार्वजनिक करके आरोपियों को गिरफ्तार करवाने की मांग भी की जा रही है, लेकिन वह लगातार इस मामले पर मौन रहे।
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बुधवार को कैबिनेट की बैठक के ठीक पहले मीडिया ने अरविंद पांडेय पर सवालों की बौछार कर दी। जवाब में शिक्षा मंत्री  ने कहा कि देश के कोने-कोने में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जब महिला खिलाड़ियों ने ऐसे आरोप लगाए हैं कि कुछ कोच और संघों से जुड़े लोग उनका उत्पीड़न करते रहे हैं। सरकार का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में इन संघों के कुछ लोगों ने गलत काम किया, जिसकी जानकारी मुझे खुद क्रिकेटरों ने दी है। 

पांडेय ने कहा कि जिन बच्चों के साथ ऐसा अनैतिक काम हुआ है, उन्होंने यह भी कहा कि उन लोगों का जीवन तो चौपट कर दिया गया, वरना वे भी एकता और मानसी जैसे खिलाड़ी बन सकते थे। उन्होंने अनुरोध किया कि ऐसी कोशिश कीजिए कि जैसा हमारे साथ हुआ है, वह और किसी के साथ न हो। इस पर उन्होंने उनसे पूछा कि यदि वह इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करूं तो क्या पीड़िताएं साथ खड़ी होंगी, इस पर उनका जवाब था कि ऐसे में उनका परिवार खत्म हो जाएगा।

मंत्री ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में कुछ व्यक्तियों के जीवन का सवाल भी हैं। ऐसे में वह ऐेसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे किसी का घर तबाह हो जाए। सुबूत होने के बावजूद उन्हें छुपाने पर खुद उनके कानूनी कार्रवाई के घेरे में आने की बात पूछी गई तो शिक्षा मंत्री ने कहा कि उनके ऊपर क्या कानूनी कार्रवाई होगी, इसकी उन्हें परवाह नहीं। मगर किसी का परिवार बर्बाद करके वह कार्रवाई नहीं करेंगे।

बयानबाजी से देश भर में राज्य के खेल संघों की बदनामी होने के विपक्ष के आरोपों पर शिक्षा मंत्री से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि देवभूमि में आज तक कंकाल मिल रहे है और वे लोग उनसे बदनामी की बात कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य गठन के सत्रह साल बनाम उनके कार्यकाल के सात महीने की तुलना करके देख ली लिजिए कि उन्होंने क्या काम किया है। आखिर में उन्होंने कहा कि जिनके साथ यह घटना घटी है, वे मजबूती के साथ जब तक खड़े नहीं होंगे, तब तक वह किसी कानूनी कार्रवाई के लिए आगे नहीं आएंगे।
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