टैक्सी संचालकों की राज्यव्यापी हड़ताल और चार धाम यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों की भारी फजीहत के बाद आखिरकार शासन और सरकार ने आनन-फानन में निर्णय लेकर स्पीड गवर्नर की अनिवार्यता को एक माह के लिए टाल दिया है।
अपर परिवहन आयुक्त सुनीता सिंह ने बताया कि आरटीओ सुधांशु गर्ग की अगुवाई में चार सदस्यीय तकनीकी कमेटी का गठन कर दिया गया है, जो एक माह के भीतर तमाम पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपेगी। जिसे केंद्र सरकार को प्रेषित किया जाएगा। कमेटी में देहरादून आरटीओ सुधांशु गर्ग के अलावा कोटद्वार के एआरटीओ एवं तकनीकी अधिकारी रावत सिंह, संभागीय प्राविधिक निरीक्षक चंद्रकांत भट्ट एवं आईडीटीआर के निदेशक आशीष शुक्ला को शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि तकनीकी कमेटी में शामिल अधिकारी राज्य के पर्वतीय इलाकों में स्पीड गवर्नर लगी गाड़ियों और बिना स्पीड गवर्नर वाली गाड़ियों का संचालन कर यह पता लगाएंगे कि स्पीड गवर्नर लगाया जाय या नही? फिलहाल एक माह का समय देकर गाड़ी संचालकों को राहत तो दे ही दी है।
पुरानी गाड़ियों में स्पीड लिमिट डिवाइस केंद्र सरकार के निर्देश पर लगाया जा रहा है। जिसकी मानीटरिंग सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोड सेफ्टी पर गठित कमेटी भी कर रही है। गाड़ियों में स्पीड लिमिट डिवाइस लगाई जा सके, इसके लिए राज्य में नौ कंपनियों को अधिकृत किया गया है जो सीआईआरटी जैसी नियामक संस्थाओं से मान्यता प्राप्त हैं।
फिलहाल स्पीड लिमिट डिवाइस की अनिवार्यता को एक माह के लिए टाल दिया गया है। तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- सुनीता सिंह, अपर परिवहन आयुक्त