राजधानी के परेड ग्राउंड में विभिन्न खेलों के प्रशिक्षण और अभ्यास के लिए जाने वाले खिलाड़ियों पर सरकारी लापरवाही भारी पड़ रही है।
यहां खेल परिसर के निर्माण के लिए 11 जुलाई को टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होने और कार्यदायी संस्था उत्तराखंड पेयजल संसाधन एवं विकास निगम को बजट की पहली किस्त मिलने के बावजूद काम शुरू नहीं हो सका है।
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दूसरी ओर, जिला योजना के तहत शुरू हुए काम भी अब तक अधर में हैं। स्पेशल प्लान असिस्टेंस के तहत परेड ग्राउंड में 400 मीटर एथलेटिक ट्रैक, जॉगिंग ट्रैक और अन्य खेल मैदानों का प्रस्ताव मंजूर किया गया था। कुल बजट 468.32 लाख रुपए में से पहली किस्त 273.81 लाख रुपए कार्यदायी संस्था को दिए जा चुके हैं।
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प्रोजेक्ट मैनेजर अमर ज्योति डोबरियाल ने अगस्त में काम शुरू करने का दावा किया था। लेकिन आधा सितंबर बीतने के बाद भी निर्माण तो दूर खुदाई भी शुरू नहीं हो सकी है। वहीं जिला योजना के तहत 49 लाख रुपए लागत से बनने वाले बास्केटबाल, वॉलीबाल और टेनिस के एक-एक कोर्ट के लिए जून में शुरू हुआ काम भी बंद है।
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सूत्रों की मानें तो समय बढ़ने के बाद बजट भी बढ़ जाता है। इस कारण निर्माण एजेंसी काम में ढिलाई कर रही है। उधर, जिला खेल अधिकारी राजेश ममगाईं ने कहा कि टेंडर होने के बाद बांड का पूरा हो गया है। इस सप्ताह से काम शुरू होने की उम्मीद है।
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