कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उत्तरांखड में छह दिन अपने प्रवास के बाद शताब्दी एक्सप्रेस से दिल्ली लौट गईं।
शताब्दी में सफर करते वक्त सोनिया गांधी के एक और बड़े राज से पर्दा उठा है। उन्होंने सामान्य यात्री की तरह शताब्दी में यात्रा की।
यह पहला मौका है जब वह छह दिन तक कौसानी में रहीं। इस बार उन्होंने समस्याएं भी सुनीं। सोनिया का कौसानी (बागेश्वर) में इस बार का प्रवास पिछले बार की तुलना में अलग था।
इस बार का दौरा था पहले से अलग
आमतौर पर सुमन दुबे की पत्नी के साथ घर के अंदर ही रहने वाली सोनिया गांधी पिछले कुछ सालों से आसपास के मंदिरों में तो जाती थीं, लेकिन उनके जाने की भनक किसी को नहीं लगती थी।
इस बार वह खुले तौर पर मंदिरों और आसपास के रमणीक स्थलों के भ्रमण पर निकलीं, स्थानीय लोगों से मिलीं और उन्होंने लोगों की समस्याएं भी सुनीं।
इधर, काठगोदाम से शताब्दी एक्सप्रेस में कांग्र्रेस अध्यक्ष का टिकट एक्स्ट्रा कोच में एक से सात नंबर सीट तक बुक थी।
सोनिया गांधी नहीं 'सुनि जी'
रेलवे की आरक्षित सूची में सुरक्षा की दृष्टि से उनका नाम ‘सुनि जी’ लिखा गया था।
उनके साथ सुमन दुबे, मंजू दुबे, पाल सिंह, सुधीर वर्मा, एम त्यागी और सुरेंद्र के नाम से सीट आरक्षित थी।
काठगोदाम स्टेशन प्रबंधक सुनील यादव, सीटीईटी आरके सेठ आदि रेलवे व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने को पहले ही पहुंच गए थे।
स्टेशन में था सुरक्षा बल तैनात
सोनिया गांधी के निजी दौरे का हवाला देते हुए सुरक्षा कर्मियों ने मीडिया और उनको देखने आई जनता को दूर रखा।
पूरा अमला गेट संख्या एक पर तैनात था, लेकिन सोनिया गांधी को गेट नं. दो से कोच में पहुंचा दिया गया।
कोच में यात्रा कर रहे पूर्व सांसद महेंद्र पाल ने लोगों की गुजारिश पर सोनिया से लोगों से मिलने की गुजारिश भी की लेकिन बात नहीं बनी। इस दौरान स्टेशन पर काफी सुरक्षा बल तैनात था।