पिता अपनी संतान की बेहतरी के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। ऐसे में अगर पिता पद पर आसीन हो तो नियमों के साथ खिलवाड़ कर पुत्र को असंभव दिखने वाली कुर्सी भी दिलाने में समस्या नहीं आती है।
पंतनगर विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर मार्केटिंग के पद पर फाइनेंस में डिप्लोमा किए बेटे को आसीन करा दिया। नियुक्त के आदेश पंतनगर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. मंगला राय ने दिए। हाईकोर्ट से छह माह में मामले को निस्तारित करने के आदेश भी धूल फांक रहे हैं और दस माह बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है। कार्रवाई के संबंध में कुलाधिपति को पांच बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है।
पंतनगर विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर मार्केटिंग के पद पर नियुक्ति के लिए जुलाई 2015 में विज्ञापन निकला था। 11 सितंबर 2015 को नियुक्ति के लिए साक्षात्कार हुए और 19 नवंबर 2015 को डा. जयंत गौतम को नियुक्त कर दिया गया। इस पद के लिए डा. सतीश चंद्र पंत ने भी आवेदन किया था।
नियुक्ति के लिए यूजीसी एवं आईसीएआर की अर्हता थी कि अ?यर्थी नेट पास होना चाहिए। नेट न होने पर पीएचडी रेग्युलेशन 2009 के अनुसार होनी चाहिए एवं साथ में नास (नेशनल एकेडमी आफ एग्रीकल्चरल साइंसेस) रेटिंग के दो पेपर भी होने जरूरी थे।
सूत्रों की मानें तो डा. जयंत नेट पास नहीं थे और नास रेटिंग का एक भी पेपर नहीं था। जबकि स्क्रीनिंग कमेटी ने एक पेपर को नास रेटिंग दिखाया और दूसरा पेपर साक्षात्कार के समय दिखाने के निर्देश दिए। जबकि दूसरे आवेदन कर्ता डा. सतीश चंद्र पंत के पास एमबीए की डिग्री है साथ ही नेट भी पास कर रखा है। डा. पंत के पास नास रेटिंग का पेपर भी उपलब्ध है।
डा. पंत के पास नास रेटिंग के अलावा अन्य पेपर भी मार्केटिंग फील्ड के ही हैं, जबकि डा. गौतम का एक ही रिसर्च पेपर मार्केटिंग फील्ड से नहीं है। इस मामले डा. पंत ने नवंबर 2015 में न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने कुलाधिपति को निर्देश दिए कि छह माह के भीतर मामले को निस्तारित करें।
नौ माह पूरे होने के बाद भी मामला लटका हुआ है और डा. पंत न्याय के लिए कुलाधिपति कार्यालय में पांच रिमाइंडर भेज चुके हैं। इस मामले में कुलपति एवं कुलसचिव डा. जे कुमार से बात करने का प्रयास किया मगर उन्होंने न तो फोन उठाया और न ही मेल का जवाब दिया।