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खुद सेना में भर्ती न हो पाए तो बेटे को वर्दी में देख गर्व से भर गए पिता, 27 साल बाद पूरा हुआ सपना

Sun, 09 Dec 2018 09:38 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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गोविंद सिंह नगरकोटी
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पिता की चाहत थी कि वे सेना में जाएं, लेकिन 27 साल बाद बेटे को वर्दी में देख पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। हल्द्वानी के तीन पानी अशोक विहार निवासी नाथू सिंह नगरकोटी के पोते मयूर नगरकोटी शनिवार को अफसर बन गए।

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मयूर को बेस्ट इन ड्रिल कैडेट पुरस्कार भी मिला। मयूर के पिता गोविंद सिंह नगरकोटी परिवहन विभाग में लिपिक के पद पर तैनात हैं। गोविंद सिंह कहते हैं कि वे खुद सेना में भर्ती होना चाहते थे, लेकिन किन्हीं कारणों से यह सपना पूरा नहीं हो पाया।

इसके बाद  परिवहन विभाग में नौकरी कर ली। हालांकि तीनों भाई हरेंद्र नगरकोटी, देवेंद्र नगरकोटी और साकेत सिंह नगरकोटी सेना में हैं। पिता नाथू सिंह भी सेना से सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। अफसर बनने के बाद बेटे मयूर ने उनका सपना पूरा कर दिया है। 
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वहीं अफसर पोते को देखकर दादा नाथू सिंह का भी सीना चौड़ा हो गया। नाथू सिंह का कहना है कि यूं तो दो पीढ़ियां बरसों से देश की सेवा में लगी हैं, लेकिन इच्छा थी कि कोई मेरे घर से भी अफसर भर्ती हो।

यह सपना मेरा मेरे पोते मयूर ने पूरा कर दिया। मेरा मयूर अब लेफ्टिनेंट मयूर हो गया। लेफ्टिनेंट मयूर के बड़े भाई विशाल इसरो में यांत्रिक अभियंता है और बहन कीर्ति पंतनगर विवि से पीएचडी कर रही हैं।

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फर्स्ट सेल्यूट टू माई डियर डैड 

‘फर्स्ट सैल्यूट टू माई डियर डैड’ ये शब्द शनिवार को सैन्य अफसर बने पौड़ी के रहने वाले सौरभ बहुगुणा के थे। वे अपने पिता के सामने खड़े थे। बेटे को सैल्यूट करता देख पिता की आंखें खुशी से छलछला उठीं। वहीं, परिवार के अन्य सदस्यों के चेहरों पर भी खुशी तैर रही थी। 

सौरभ के पिता चंद्र प्रकाश कोच हैं। सौरभ बताते हैं कि पिता चंद्र प्रकाश बहुगुणा बचपन से ही सेना में अफसर बनने के लिए प्रेरित करते थे। सौरभ कहते हैं कि उन्हें खेल में रुचि थी, इस दौरान जब सेना की टीम आती थी तो पिता की बात याद आती थी।

यही कारण है कि सेना में ही जाने के लिए तय किया। एनडीए की परीक्षा दी और पास हो गया। चंद्र प्रकाश बहुगुणा कहते हैं कि सौरभ की कामयाबी पर बहुत गर्व हो रहा है। वहीं, माता गुड्डी देवी और बहन सुरभि भी काफी खुश दिखीं। 
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