अभिमन्यु ने अपने नाम को किया चरितार्थ, हर परीक्षा में पाया उच्च स्थान
आईएमए में उष्कृष्ट प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीतने वाले जयपुर के लेफ्टिनेंट अभिमन्यु सिंह ने अपने नाम को चरितार्थ किया है। वह इससे पहले एनडीए में भी राष्ट्रपति स्वर्ण पदक हासिल कर चुके हैैं। देहरादून स्थित नेशनल इंडियन मिलिट्री काॅलेज में भी उन्हें स्वार्ड ऑफ ऑनर का सम्मान प्राप्त हुआ था।
लेफ्टिनेंट अभिमन्यु सिंह ने बताया कि उनकी शुरू से इच्छा थी कि वह सेना में जाएं। उनके दादा मूल सिंह राठौर सूबेदार पद से रिटायर हुए। वहीं, नाना फतेह सिंह शेखावत वायुसेना में वारंट अफसर थे। इसी ख्वाहिश के चलते उन्होंने राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री काॅलेज की प्रवेश परीक्षा दी और सफल रहे। उनके पिता तेजपाल सिंह ने बताया कि अभिमन्यु शुरू से ही बेहतरीन छात्र रहे। एनडीए की प्रवेश परीक्षा को पहली बार में ही अखिल भारतीय स्तर पर दूसरे रैंक के साथ पास किया। तेजपाल सिंह ने बताया कि वह व्यवसायी हैं और उनकी मां रतन कंवर सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। अभिमन्यु की बहन सलोनी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही है।
किसान परिवार के कमलप्रीत ने अफसर बन किया पिता का सपना पूरा
भटिंडा पंजाब निवासी एक साधारण किसान परिवार के कमलप्रीत न केवल सेना में अफसर बने, बल्कि उन्होंने अपनी काबिलियत से कांस्य पदक भी प्राप्त किया है। कमलप्रीत के पिता अंग्रेज सिंह किसान और मां सुखविंदर कौर गृहणी हैं। कमलप्रीत ने बताया कि उनके पिता की भी सेना में जाने की इच्छा थी। खूब तैयारी की लेकिन स्वास्थ्य कारणों से उनका सेना में चयन नहीं हो सका। वह चाहते थे कि उनका बेटा उनके सपने को पूरा करे। कमलप्रीत ने भटिंडा के ही सरकारी स्कूल से पढ़ाई पूरी की और 2014 में फौज में भर्ती हो गए। सपना अफसर बनने का था, ऐसे में एसीसी की राह चुनी। अपने अथक परिश्रम से वह अब लेफ्टिनेंट बन गए हैैं। उनके कांधे पर सितारे सजाते माता-पिता की आंखें नम थी।
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शहीद के पोते बने अफसर, जीता रजत
देहरादून। जोधपुर राजस्थान के रहने वाले सूर्यभान राठौर ने अपनी सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया। उनके नाना शहीद मेघ सिंह थे, जो 1971 की जंग में शहीद हुए थे। पिता हरबंश सिंह भी आर्मी से रिटायर्ड हैं। माता बरजू गृहणी हैं। सूर्यभान सिंह ने कहा कि उनके दादा से लेकर नाना तक फौज में थे। इसलिए उन्हें फौज में जाने की ललक शुरू से थी। आर्मी स्कूल में उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की। उन्हें मल्टीनेशनल कंपनियों की नौकरी कभी नहीं भाई। उन्होंने कहा कि वह एक अच्छा सैन्य अफसर बनकर देश के साथ ही प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। आईएमए में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें रजत पदक से सम्मानित किया गया।