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IMAPOP 2023: किसी ने बढ़ाई सैन्य विरासत तो किसी ने कठिन परिश्रम से पाया मुकाम, जोश भर देंगी ये कहानियां

Sun, 11 Jun 2023 07:39 AM IST
देहरादून ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून

सार

IMA POP 2023 Dehradun: भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से शनिवार को (आज) 331 युवा अफसर देश सेवा के लिए सेना की मुख्यधारा में जुड़ गए। इसके साथ ही मित्र राष्ट्रों के 42 कैडेट्स भी पास आउट हुए। पासिंग आउट परेड की सलामी इस बार सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडेय ने ली।
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आईएमए पीओपी देहरादून 2023 - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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भारतीय सैन्य अकादमी से हर साल सैकड़ों कैडेट पासआउट होकर सेना में अफसर बनते हैं। इनमें कुछ ऐसे भी होते हैं, जिनके लिए यहां तक पहुंचना किसी सपने से कम नहीं होता है। विपरीत परिस्थितियों में कड़ी मेहनत से खुद को तराशकर सफलता पाने वाले इन युवा अफसरों की कहानी सुनते हैं उन्हीं की जुबानी।

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स्वार्ड ऑफ ऑनर विजेता मिहिर बनर्जी के परिवार में पूरे देश की झलक
आईएमए में स्वार्ड ऑफ ऑनर व रजत पदक विजेता मिहिर बनर्जी के परिवार में पूरे देश की झलक दिखती है। उनके पिता ब्रिगेडियर चंचल बनर्जी बंगाली, जबकि मां नांगबी मणिपुरी हैैं। वहीं, मिहिर खुद की पहचान किसी राज्य से नहीं, बल्कि भारतीय होने से बताना पसंद करते हैं। पुणे, महाराष्ट्र निवासी मिहिर के बड़े भाई लेफ्टिनेंट सौरव बनर्जी पिछले साल आईएमए से पासआउट हुए हैं।

मिहिर बचपन से ही वर्दी वालों के बीच पले बढ़े। उनकी स्कूलिंग आर्मी पब्लिक स्कूल से हुई। पिता की पोस्टिंग के साथ-साथ उनके करीब 12 स्कूल और शहर बदले। मां नांगबी ने बताया कि मिहिर बचपन से पढ़ाई और खेलकूद में अच्छे थे। 12वीं पास करते ही एनडीए के जरिये सेना में चयन हुआ। चार साल के कठिन प्रशिक्षण के बाद शनिवार को वह सेना में अफसर बन गए।
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वह कुमाऊं रेजिमेंट में कमीशन हुए हैं। उनके नाना फौज से रिटायर, जबकि मामा सेवारत हैैं। लेफ्टिनेंट मिहिर बताते हैं कि माता-पिता ने उन्हें सेना ज्वाइन करने के लिए प्रेरित किया। मिहिर बास्केटबॉल के अच्छे खिलाड़ी हैं। वह गिटार भी बजाते हैं। प्रशिक्षण के दौरान एक्टिविटी क्लब में ये शौक पूरा करने का मौका मिला। मिहिर का कहना है कि देश सेवा से बड़ा काम कुछ नहीं है।

अभिमन्यु ने अपने नाम को किया चरितार्थ, हर परीक्षा में पाया उच्च स्थान
आईएमए में उष्कृष्ट प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीतने वाले जयपुर के लेफ्टिनेंट अभिमन्यु सिंह ने अपने नाम को चरितार्थ किया है। वह इससे पहले एनडीए में भी राष्ट्रपति स्वर्ण पदक हासिल कर चुके हैैं। देहरादून स्थित नेशनल इंडियन मिलिट्री काॅलेज में भी उन्हें स्वार्ड ऑफ ऑनर का सम्मान प्राप्त हुआ था।

लेफ्टिनेंट अभिमन्यु सिंह ने बताया कि उनकी शुरू से इच्छा थी कि वह सेना में जाएं। उनके दादा मूल सिंह राठौर सूबेदार पद से रिटायर हुए। वहीं, नाना फतेह सिंह शेखावत वायुसेना में वारंट अफसर थे। इसी ख्वाहिश के चलते उन्होंने राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री काॅलेज की प्रवेश परीक्षा दी और सफल रहे। उनके पिता तेजपाल सिंह ने बताया कि अभिमन्यु शुरू से ही बेहतरीन छात्र रहे। एनडीए की प्रवेश परीक्षा को पहली बार में ही अखिल भारतीय स्तर पर दूसरे रैंक के साथ पास किया। तेजपाल सिंह ने बताया कि वह व्यवसायी हैं और उनकी मां रतन कंवर सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। अभिमन्यु की बहन सलोनी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही है।
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किसान परिवार के कमलप्रीत ने अफसर बन किया पिता का सपना पूरा
भटिंडा पंजाब निवासी एक साधारण किसान परिवार के कमलप्रीत न केवल सेना में अफसर बने, बल्कि उन्होंने अपनी काबिलियत से कांस्य पदक भी प्राप्त किया है। कमलप्रीत के पिता अंग्रेज सिंह किसान और मां सुखविंदर कौर गृहणी हैं। कमलप्रीत ने बताया कि उनके पिता की भी सेना में जाने की इच्छा थी। खूब तैयारी की लेकिन स्वास्थ्य कारणों से उनका सेना में चयन नहीं हो सका। वह चाहते थे कि उनका बेटा उनके सपने को पूरा करे। कमलप्रीत ने भटिंडा के ही सरकारी स्कूल से पढ़ाई पूरी की और 2014 में फौज में भर्ती हो गए। सपना अफसर बनने का था, ऐसे में एसीसी की राह चुनी। अपने अथक परिश्रम से वह अब लेफ्टिनेंट बन गए हैैं। उनके कांधे पर सितारे सजाते माता-पिता की आंखें नम थी।

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शहीद के पोते बने अफसर, जीता रजत
देहरादून। जोधपुर राजस्थान के रहने वाले सूर्यभान राठौर ने अपनी सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया। उनके नाना शहीद मेघ सिंह थे, जो 1971 की जंग में शहीद हुए थे। पिता हरबंश सिंह भी आर्मी से रिटायर्ड हैं। माता बरजू गृहणी हैं। सूर्यभान सिंह ने कहा कि उनके दादा से लेकर नाना तक फौज में थे। इसलिए उन्हें फौज में जाने की ललक शुरू से थी। आर्मी स्कूल में उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की। उन्हें मल्टीनेशनल कंपनियों की नौकरी कभी नहीं भाई। उन्होंने कहा कि वह एक अच्छा सैन्य अफसर बनकर देश के साथ ही प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। आईएमए में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें रजत पदक से सम्मानित किया गया।
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