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शीतोष्ण फलों के लिए वरदान है बर्फबारी, बागवानों के चेहरे भी खिले उठे

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- फोटो : अमर उजाला
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जौनसार बावर क्षेत्र के ऊंचाई वाले इलाकों में मार्च में मौसम की मेहरबानी देख बागवानों के चेहरे भी खिले उठे हैं। ऊंचाई वाली चोटियों पर सीजन का यह 12वां हिमपात हैं। बागवानों का कहना है कि लंबे समय बाद क्षेत्र की पहाड़ियों पर एक सीजन में इतनी बर्फबारी हुई है। यह बर्फबारी शीतोष्ण फलों के उत्पादन में अहम साबित होगी। इससे लंबे समय तक जमीन में नमी बनी रहेगी, जिससे सेब, आड़ू, पुलम, खुमानी जैसी फसलों के जरूरी चिलिंग ऑवर पूरा करने में काफी मदद मिलेगी।
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मालूम हो कि जनजातीय क्षेत्र के ऊंचाई वाले इलाकों में सेब की बंपर पैदावार की जाती है। इसमें से रेड डिलिशियस और गोल्डन डिलिशियस प्रजाति के सेब अपने स्वाद के लिए खासा पहचाने जाते हैं। हर साल बाजार में इन सेब की भारी डिमांड है। इन प्रजाति के सेब को पनपने के लिए 1400 से 1600 घंटे (करीब 56 दिन) तक दो से तीन डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है।

ऐसे में इस साल जिस तरह से क्षेत्र में बर्फबारी हुई है। उसको देखकर बागवानों को उम्मीद है कि सेब के लिए जरूरी चिलिंग ऑवर लगभग पूरे हो चुके हैं। लोहारी के बीडीसी मेंबर रमेश चौहान, मोहर सिंह, धूूमी चौहान का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय बाद एक सीजन में इतनी बर्फबारी हुई है, जिससे फसल के बंपर उत्पादन के चांस काफी बढ़ गए हैं।
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जिले में यहां होता है उत्पादन

देहरादून जिले के जौनसार बावर क्षेत्र में कथियान, डांगूठा, हटाड़, भटाड़, छजाड़, बुन्हाड़, एंथाड़, ओबरासेर, फनार, भूट, पुरटाड़, रडू़, मुंधोल, डेरसा, प्यूनल, भाटगड़ी क्षेत्र में इन सेब की बंपर पैदावार होती है।

बर्फबारी से सेब उत्पादन में इस साल अच्छा उछाल देखने को मिलेगा। जितने लंबे समय तक पहाड़ में बर्फ टिकी रहेगी उतने ही लंबे समय तक जमीन में नमी बनी रहेगी।
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- आरपी जसोला, वरिष्ठ उद्यान प्रभारी त्यूनी/चौसाल
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