गुप्तकाशी में कालीमठ घाटी के दूरस्थ जाल तल्ला गांव में बर्फबारी से पशुपालक बीरेंद्र सिंह राणा के 8 बकरियों की मौत हो गई। जबकि पांच बकरियां बीमार हैं। ग्राम प्रधान व अन्य ग्रामीणों ने पीड़ित को मुआवजा दिए जाने की मांग की है। बीते 27 फरवरी को पशुपालक अपनी 40 बकरियों को चुगाने गांव से दूर जंगल में गया था। इस दौरान हल्की बारिश हो रही थी। लेकिन बाद में बर्फबारी होने लगी। पशुपालक अपनी बकरियों को लेकर घर के लिए लौटने लगे। लेकिन गांव तक पहुंचने से पूर्व आठ बकरियों की रास्ते में ही मौत हो गई। जबकि 5 बेसुध हो गई।
पीड़ित ने गांव पहुंचकर ग्राम प्रधान व अन्य को घटना के बारे में सूचित किया। प्रधान द्वारा राजस्व उप निरीक्षक व पशुपालन विभाग को जानकारी दी गई। इधर, शुक्रवार को पशुधन प्रसार अधिकारी बीएस असवाल व राजस्व उप निरीक्षक मान सिंह ने गांव पहुंचकर घटना के बारे में पूरी जानकारी ली। साथ ही मृत बकरियों का मौके पर ही पोस्टमार्टम किया गया। पशुधन प्रसार अधिकारी ने बताया कि बकरियों की मौत ठंड के कारण हुई है। राजस्व उप निरीक्षक ने बताया कि रिपोर्ट तैयार कर तहसील को भेजी जाएगी, जिसके बाद पीड़ित को मुआवजा दिया जाएगा।
वहीं मुनस्यारी भारत-चीन सीमा पर स्थित अंतिम गांव कुटी में बर्फ में दबकर 42 बकरियों और एक घोड़े की मौत हो गई। दो घोड़े लापता हैं। थल-मुनस्यारी सड़क पर बर्फ होने से तीसरे दिन भी सड़क पर यातायात सुचारु नहीं हुआ।