उत्तराखंड में कुमाऊं के उच्च हिमालयी क्षेत्र पहली बार हिम तेंदुआ दिखा है। वन विभाग को इसके पुख्ता साक्ष्य मिले हैं।
बागेश्वर वन प्रभाग में ग्लेशियर रेंज के सुंदरढूंगा इलाके में हिम तेंदुए की फोटो वन विभाग द्वारा क्षेत्र में लगाए गए कैमरों में आई है। हिम तेंदुए की यह फोटो 29 जून की रात ढाई बजे कैमरे में कैद हुई है।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों के वन्यजीवों का अध्ययन कम हुआ है। ग्लेशियर जैसी जगहों पर वन्यजीवों की स्थिति को जानने के लिए 2013 में बेस लाइन सर्वे तत्कालीन सीसीएफ कुमाऊं परमजीत सिंह के निर्देश पर किया गया। इसमें कस्तूरी मृग के अलावा हिम तेंदुए के होने के भी संकेत मिले।
इसके बाद आधुनिक संसाधनों के जरिए अध्ययन का काम शुरू किया गया। गढ़वाल-कुमाऊं में स्नो लेपर्ड पर अध्ययन कर रहे विपुल मौर्य के मुताबिक उन्होंने 4100 मीटर की ऊंचाई वाली जगहों पर आठ कैमरे लगाए। एक कैमरे में हिम तेंदुए की फोटो आई है। अभी अध्ययन चल रहा है। और भी हिम तेंदुए वहां हो सकते हैं।
मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डा. राजेंद्र सिंह बिष्ट कहते हैं कि करीब 40 दिन से वनाधिकारी शंकर कुमार, प्रमोद कुमार और वन्यजीव विशेषज्ञों समेत वन विभाग की टीम ग्लेशियर रेंज में डेरा डाले थी। टीम में नैनीताल से भी कर्मचारी भेजे गए थे।
टीम ने एक हिम तेंदुआ मिलने की फोटो भेजी है। कुमाऊं के उच्च हिमालयी क्षेत्र में पहली बार हिम तेंदुआ होने का साक्ष्य मिला है। यह जैव विविधता की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। इलाके में सुरक्षा प्रबंध भी सख्त किए गए हैं।
तिब्बती भेड़िया भी मिला था
बागेश्वर वन प्रभाग का उच्च हिमालयी क्षेत्र वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण है। करीब दो साल पहले यहां तिब्बती भेड़िया भी मिला था।