पुलिस ने कछुआ तस्करी का भंडाफोड़ करते हुए मारुति वैन में लाए जा रहे संरक्षित प्रजाति के 222 कछुओं के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है जबकि एक आरोपी फरार हो गया।
तीन बोरों से बरामद कछुओं को औरेया यूपी से लाया गया था। आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है तथा पकड़े गए सभी आरोपियों को रुद्रपुर कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। इसके अलावा, कछुओं को वन विभाग को सौंप दिया गया है।
शनिवार सुबह करीब साढ़े तीन बजे कोतवाल जेसी पाठक टीम के साथ गश्त कर रहे थे। तीनपानी बैरियर पर पास किच्छा की तरफ से आ रही मारुति वैन संख्या यूपी 78 ईबी 5503 को रोकने का इशारा किया, लेकिन चालक ने वाहन रोकने के बजाय तेजी से आगे ले गया।
शक होने पर पीछा करते हुए पुलिस ने दोबारा चालक को रोकने की कोशिश की तो उसने वाहन नहीं रोका। श्मशान घाट के समीप पुलिस ने अपनी गाड़ी आगे लगाकर वैन को रुकवाया। तलाशी लेने पर वैन में तीन बोरों में रखे 222 कछुओं को बरामद किया गया।
वैन में बैठी अनीता पत्नी स्व. लाखन सिंह, इमरान निवासी ग्राम कुंदनपुर उर्दकोटा थाना बिगौन औरेया और तापस निवासी वार्ड नंबर 1 ट्रांजिट कैंप को गिरफ्तार किया। मुख्य आरोपी राजू निवासी मुखर्जी नगर ट्रांजिट कैंप पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। कोतवाल जेसी पाठक ने बताया कि बरामद सभी कछुओं में 200 छोटे और 22 बड़े हैं। इन्हें औरेया से दिल्ली ले जाया जा रहा था। पकड़े गए कछुओं की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक है।
कछुओं से बनती हैं शक्तिवर्धक दवाएं
रुद्रपुर। बंगाली लोग कछुओं का मांस पसंद करते हैं। कछुओं का मांस गर्म माना जाता है। यही कारण है कि बंगाली बाहुल्य क्षेत्र में कछुओं की काफी डिमांड रहती है। कछुओं के अंगों से शक्तिवर्धक दवाइयां भी बनाई जाती हैं। कछुओं के कवच से बर्तन और अन्य सामान भी बनाए जाते हैं।
शेड्यूल 2 में आते हैं पकड़े गए कछुए
रुद्रपुर। तराई केंद्रीय वन प्रभाग के डीएफओ डॉ. पराग मधुकर धकाते बताते हैं कि पकड़े गए कछुए गॅनजेटिक सोफ्टसेल टरटेल (गंगेय मृदा शल्य कछुआ) प्रजाति हैं। यह शेड्यूल 2 में आते हैं। मांस की वजह से कछुओं की तस्करी होती है। यह गंगा नदी में पाए जाते हैं। गंगा नदी और आसपास के क्षेत्रों में सामान्यतया मिल जाते हैं।