सरकार ने भले ही दून की 123 मलिन बस्तियों को नियमित करने का आदेश दे दिया है लेकिन इस राह में रोड़े ही रोड़े हैं।
इसके लिए सन दो हजार का सर्किल रेट तो तय है लेकिन कई ऐसे इलाके भी हैं जहां रजिस्ट्री पर हजारों रुपये लोगों को चुकाने होंगे। ऐसे में लोगों के लिए आर्थिक भार उठाना मुश्किल हो जाएगा और भूमाफिया भी सक्रिय होंगे।
यहां हैं मलिन बस्तियां
शहर में डालनवाला क्षेत्र, राजपुर रोड, मोहनी रोड, चकराता रोड, कावंली रोड पर कई मलिन बस्तियां, ऐसी हैं जिनका सर्किल रेट ज्यादा होगा।
इन क्षेत्रों में लगभग बीस से पचास हजार की तो रजिस्ट्री होगी। ऐसे में कई ऐसे गरीब परिवार हैं जो रजिस्ट्री नहीं करा पाएंगे। ऐसे में भूमाफिया सक्रिय हो सकते हैं।
क्या कहते हैं मेयर
मेयर विनोद चमोली ने बताया कि मलिन बस्तियों के नियमितीकरण से पहले रिस्पना नदी की चौड़ाई तय करनी जरूरी है। कई बार नदी के बहाव से कई बार घर ध्वस्त हो जाते हैं। ऐसे में तय करना पड़ेगा कि घर कहां तक हों।
वहीं राजपुर रोड के कांग्रेस विधायक राजकुमार का कहना है कि लोगों पर ज्यादा भार नहीं पड़ेगा। बीस हजार परिवारों को फायदा होगा।
बस्तियों में भ्रम का कोहरा
बस्तियों के नियमितीकरण से भ्रम की स्थिति भी पैदा हो गई है। एक ओर सरकार बोल रही है कि बस्तियों का नियमितीकरण होगा और सन 2001 के सर्किल रेट पर रजिस्ट्री भी होगी।
दोनों बातें अलग है। नियमितीकरण में पट्टे दिए जाते हैं जबकि रजिस्ट्री फ्रीहोल्ड में होती है। ऐसे में मलिन बस्ती के लोग भ्रम में है कि उन्हें फ्रीहोल्ड का हक मिला है या पट्टे का।