प्रदेश की 582 मलिन बस्तियों में रहने वाले लाखों लोगों को उनका मालिकाना हक 15 अक्टूबर तक मिल जाएगा। मालिकाना हक देने में देरी न हो इसके लिए राजस्व अफसरों की तैनाती के साथ ही कंसलटेंट की भी नियुक्ति की जाएगी। मलिन बस्तियों का पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन संबंधी विधेयक पारित होने के बाद सरकार व राजस्व विभाग हरकत में आ गए हैं।
इसको लेकर शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिंह पंवार की मौजूदगी में विधानसभा सभागार में हुई बैठक में विनियमितीकरण समेत तमाम मुद्दों पर चर्चा की गई। शहरी विकास मंत्री ने कहा कि मलिन बस्तियों के सुधार, विनियमितीकरण, पुनर्वासन, मूल्य एवं शुल्क का निर्धारण और भविष्य में नई मलिन बस्तियों के बसावट पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार को नियम बनाने का अधिकार है।
सरकार की मंशा है कि 15 अक्टूबर तक मलिन बस्तियों के लोगों को पट्टे देकर मालिकाना हक प्रदान करा दिया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लोगों को उनका मालिकाना हक दिलाने के लिए मुस्तैदी से काम करें।
मालिकाना हक को करना होगा पंजीकरण
बैठक में उपस्थित वन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने कहा कि मलिन बस्तियों के चिन्हीकरण और कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए डीएम की अध्यक्षता में समिति का गठन कर लिया जाए। बस्तियों की सूची तैयार कर चिह्नित परिवारों का पंजीकरण और पहचान पत्र लिए जाएं। पंजीकरण के लिए निवास प्रमाण पत्र, बिजली, पानी, टेलीफोन का बिल, मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट अथवा अन्य प्रमाणिक अभिलेख उक्त सभी कार्य डीएम की देखरेख में संपन्न हों।
विनियमितीकरण की प्रक्रिया को तेजी से निपटाया जा सके इसके लिए पीसीएस अधिकारी की फुल टाइम नियुक्ति के साथ ही नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी की नियुक्ति भी की जाए, जो जमीनों का चिन्हीकरण, वर्गीकरण और भूमि के प्रकार के बारे में जानकारी दे सके। कहा कि योजना को मूर्तरूप देने के लिए कंसलटेंट की नियुक्ति की जाए।
इन्हें मिलेगा मालिकाना हक
सचिव शहरी विकास डीएस गर्ब्याल ने बताया कि मलिन बस्तियों में भू-स्वामित्व का अधिकार क्षेणी एक और श्रेणी दो के परिवारों के यदि स्त्री मुखिया हो अथवा परिवार के मुखिया व उसकी पत्नी के संयुक्त नाम से हो। अधिकतम 30 वर्ग मीटर के प्लाट का भू-स्वामित्व नौ नवंबर 2000 के प्रचलित रेट पर होगा। शेष भूमि का विनियमितीकरण कब्जों की अवधि का भू-राजस्व का दोगुना और डीएम द्वारा निर्धारित सर्किल रेट का 25 फीसदी शुल्क जमा कराकर जो चार समान किस्तों में एक वर्ष में देना होगा। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पहली पीढ़ी, राज्य आंदोलनकारी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्योदय और बीपीएल को 30 वर्ग मीटर भूमि निशुल्क दी जाएगी।