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हरिद्वार-दून हाईवे : निर्माण में तेजी पर सुरक्षा प्रबंधों में ढिलाई, 2020 तक होगा पूरा

Mon, 06 May 2019 01:16 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
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निर्माण में लेटलतीफी और दुर्घटनाओं के लिए कुख्यात हरिद्वार-दून राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेजी से काम शुरू हो चुका है। इस परियोजना के एक साल में पूरे होने के आसार हैं, लेकिन तब तक ये निर्माणाधीन हाईवे और कितने लोगों की जिंदगी लीलेगा, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। क्योंकि जिन एजेंसियों को हाईवे के निर्माण का कार्य सौंपा गया है, उन्होंने सुरक्षा प्रबंधों के मामले में सावधानी नहीं बरती है। 

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दुर्घटना संभावित स्थानों पर अब भी कई सुरक्षा प्रबंध नहीं हो पाए हैं। मोहकमपुर से लेकर कुआंवाला के मध्य और भानियावाल से लालतप्पड़ के बीच और उससे आगे नेपाली फार्म-हरिद्वार के बीच कई स्थानों पर हाईवे की खतरनाक स्थिति है, लेकिन वहां सुरक्षा के उपाय नदारद हैं।

ये जानते हुए कि अब तक इस हाईवे पर 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2017 तक हाईवे पर 231 दुर्घटनाएं हो चुकी थीं, जिनमें 142 लोग मारे गए और 161 लोग घायल हुए। सबसे अधिक 54 हादसे 2013 में हुए, जिसमें 28 लोगों की मौत हुई और 48 लोग घायल हुए। 2016 में सबसे अधिक 29 लोग हाईवे पर हुई दुर्घटनाओं में मारे गए।
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हादसों ने प्रदेश सरकार और मंत्रालय को हिलाया
आधे-अधूरे हाईवे के कारण लगातार हुए सड़क हादसों ने प्रदेश सरकार और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को भी हिलाकर रख दिया। इस प्रोजेक्ट से केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गड़करी बेहद व्यथित थे और इसे मंत्रालय के लिए एक बदनुमा दाग मानते थे। लगातार हुए सड़क हादसों का मामला उच्च न्यायालय तक जा पहुंचा और न्यायालय से हाईवे के निर्माण को लेकर आदेश तक पारित हुए। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने मंत्रालय पर लगातार दबाव बनाने के बाद पुरानी कंपनी का करार निरस्त हुआ और दो नई एजेंसियों को हाईवे के निर्माण कार्य सौंपा गया।

राजमार्ग का कार्य कर रही दोनों एजेंसियों को पहले से ही ये दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि वे सुरक्षा के समुचित इंतजाम करेंगे। दुर्घटना संभावित लोकेशन पर उन्हें होर्डिंग लगाने, सुरक्षा चिन्ह व अन्य सुरक्षा के उपाय करने को कहा गया है। यदि इसमें कोई लापरवाही होगी तो उन्हें कड़ाई से दिशा-निर्देशों का अनुपालन करने को कहा जाएगा।
-सीके सिन्हा, आरओ, एनएचएआई

निर्माणाधीन खराब हाईवे पर हादसों का ब्योरा
वर्ष कुल हादसे  मौत घायल
2011 22 16 12
2012 31 15 16
2013 54 28 48
2014 29 20 16
2015 22 11 19
2016 35 29 26
2017 38 23 24
कुल 231 142 161

नोट: 2018-19 में हुए हादसों को जोड़ें तो मौत का आंकड़ा 150 के पार है

हाईवे निर्माण का अब तक का ट्रैक रिकार्ड
29 दिसंबर 2009 को मै. ईरा इंफ्रा इंजीनियरिंग प्रा. लि. को अवार्ड
24 फरवरी 2010 को एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए
01 नवंबर 2011 को हाईवे के निर्माण का कार्य आरंभ हुआ
31 अक्टूबर 2013 तक कंपनी को कार्य पूरा कर देना था
30 सितंबर 2016 तक बढ़ानी पड़ी कार्य पूरा करने की समयसीमा 630 करोड़
55 फीसदी कार्य ही पूरा हो पाया है अभी तक हाईवे चौड़ीकरण का
100 प्रतिशत भूमि उपलब्ध है इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए

परियोजना की वर्तमान स्थिति
मई 2018 में अधूरे हाईवे का करार निरस्त हुआ
45 प्रतिशत शेष कार्य के लिए निविदाएं की गईं
एनएचएआई ने कार्य को दो भागों में बांट दिया
पहला पैकेज उत्तरप्रदेश सेतु निगम लिमिटेड को दिया
दूसरा पैकेज मैसर्स एटलस कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. को सौंपा

परियोजना की लागत और कार्य
पैकेज-1 हरिद्वार के हरिपुर कला ग्राम से  नेपाली फार्म के मध्य एनएच 58 और एनएच 72 के मध्य कुल 14.948 किमी का चौड़ीकरण होना है। 6.378 किमी सर्विस रोड बननी है। मोतीचूर व रायपुर में रिअलाइमेंट के अलावा एक आरओबी, एक वाय डक्ट, तीन एलिफेंट अंडरपास, तीन पुल, 32 पुलिय व तीन बस पड़ाव बनाए जाने हैं। पैकेज की कुल लागत 350 करोड़ रुपये है। परियोजना को एक साल में पूरा करने का लक्ष्य है।

पैकेज-2 लालतप्पड़ से मोहकमपुर के मध्य एनएच 72 पर कुल 22.20 किमी का चौड़ीकरण होना है। 7.96 किमी सर्विस रोड, डोईवाला में एक बाइपास, कुआंवाल व मणिमाई मंदिर में रिअलाइमेंट के अलावा एक वाया डक्ट, एक पुल, दो वैक्यूलर अंडरपास, 65 पुलिया, छह बस पड़ा, दो ट्रक बाइलेंस व एक टोल प्लाजा का निर्माणाधीन है। इस पैकेज की कुल लागत 244 करोड़ रुपये है। एक साल में पूरा करने का लक्ष्य है।

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