साल 2012 में जाखन के एक हुक्का बार में तोड़फोड़ के चर्चित मामले में अदालत ने मंगलवार को डीएवी पीजी कॉलेज के पूर्व महासचिव भगवती प्रसाद और छात्र नेता दीपक कनवासी समेत छह आरोपियों को बरी कर दिया।
एसीजेएम तृतीय शाइस्ता बानो की अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष अभियुक्तों के खिलाफ ठोस साक्ष्य पेश करने में पूरी तरह विफल रहा है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सौरभ दुसेजा ने बताया कि रेस्टोरेंट में तोड़फोड़ और अभियुक्तों की वहां मौजूदगी का कोई सीसीटीवी फुटेज या अन्य साक्ष्य पेश नहीं किया गया। अभियोजन ने कुल सात गवाहों की सूची दी थी लेकिन सिर्फ दो औपचारिक गवाह ही पेश किए। अन्य गवाह पेश ही नहीं किए। अदालत ने कहा कि अन्य गवाहों के पेश न होने से अभियोजन की कहानी पर स्वत: संदेह होता है। बरी किए गए अन्य आरोपियों में अधिवक्ता पंकज पटवाल, जोगेंद्र, प्रदीप बुटोला व महेंद्र प्रताप शामिल हैं।
यह था घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, 16 जुलाई 2012 को डीएवी कॉलेज के छात्र नेताओं ने राजपुर रोड और जाखन क्षेत्र में चल रहे हुक्का बार के खिलाफ मोर्चा खोला था। छात्रों का आरोप था कि इन बार में नशाखोरी और जिस्मफरोशी जैसी अनैतिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान एक हुक्का बार में तोड़फोड़, मारपीट और बलवे की घटना हुई थी, जिसके बाद राजपुर पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।