फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

करोड़ों का अनाज डकार रहा जेल प्रशासन

Mon, 08 Aug 2016 10:43 AM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
Jail
विज्ञापन
कैदियों को खेती-पाती सिखाकर उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने के मकसद से आरंभ हुई सितारगंज जेल अब अधिकारियों की कमाई का जुगाड़ बन गई है।
विज्ञापन


कैदियों द्वारा किए जाने वाले कृषि उत्पादन की अंडर रिपोर्टिंग करके साल में लाखों-करोड़ों का चूना लग रहा है। यह खुलासा हाल ही में जेल निरीक्षण को गई कमेटी की रिपोर्ट में हुआ है। बेहद चौंकाने वाली इस रिपोर्ट में जेल में हर कदम में घपले-घोटाले उजागर हुए हैं। यह भी पता चला है कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद आईजी जेल को सिर्फ एक बार यहां आने की फुर्सत मिली है।

सितारगंज जेल (संपूर्णानंद शिविर) के पूर्व अधीक्षक संजीव कुमार शुक्ला के विरुद्ध अवैध खनन की शिकायत के बाद शासन ने अपर सचिव कारागार रंजीत सिन्हा की अध्यक्षता में एक कमेटी को जेल के निरीक्षण पर भेजा था। सूत्रों के मुताबिक निरीक्षण में बड़े पैमाने पर घपले और अनियमितताएं उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जेल प्रबंधन की करीब 640 एकड़ भूमि है, जिसमें से 130 एकड़ भूमि पर खेती होती है, जिसमें होने वाली आय की अंडर रिपोर्टिंग की जा रही है।
विज्ञापन


बीते कई सालों से जारी इस खेल से सरकार को करोड़ों के राजस्व की चपत लग रही है। कारागार परिसर में चिकित्सालय की स्थिति ठीक नहीं है। साथ ही यहां चिकित्साधिकारी का पद रिक्त है। परिसर में सुरक्षा लाइटें नहीं मिलीं। कारागार परिसर का निर्माण इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट ऑफ इंडिया लि. नाम की फर्म को दिया गया था, जो इसे अधूरा छोड़कर खिसक गई है। वर्ष 1960 में बनाई गई इस जेल की जमीनों की पैमाइश कभी नहीं की गई है।

आलम यह है कि समय-समय पर विभिन्न विभागों और संस्थानों को आवंटित जमीन बिना पैमाइश के ही दे दी गई। यही नहीं जेल में निरीक्षण रजिस्टर भी नहीं मिला, जिसमें आगंतुकों की रिपोर्ट या टिप्पणी जानी जा सके। सबसे हैरानी की बात यह भी है कि राज्य गठन के बाद से अब तक आईजी जेल को सिर्फ एक बार ही जेल जाने की फुर्सत मिली है। इस दौरे की भी कोई रिपोर्ट निरीक्षण को गए अफसरों को नहीं मिली।

कैदियों को भारी दुश्वारियां
एक ओर जहां सितारगंज जेल प्रशासन भरपूर मौज में है, वहीं कैदियों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व में 14 साल की जेल काटने के बाद उन्हें समयपूर्व रिहाई देने का प्रावधान था, लेकिन बीते कई सालों से यह सुविधा नहीं मिल रही है। पूर्व में साल में एक बार 15 दिन का गृह अवकाश दिए जाने की भी सुविधा थी, जो नहीं मिल रही है।
विज्ञापन


दो ग्राम कम तौलता है तराजू
निरीक्षण में बंदियों को दी जाने वाली खाद्य सामग्री के लिए बनाए गए स्टॉक रजिस्टर में भी गड़बड़ी पाई गई। खाद्य सामग्री वितरित करने के लिए रखे गए तराजू में दो ग्राम की हेरफेर पकड़ी गई। इसके अतिरिक्त बांट-माप भी अत्यधिक पुराना और बिना प्रमाणिकता का पाया गया। स्टोर के निरीक्षण में तेजाब की अत्यधिक बोतलें पकड़ी गईं, जिससे हादसे की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें