मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले के कोट ब्लाक में फलस्वाड़ी गांव में स्थित सीता माता मंदिर को सीता सर्किट के रुप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की गई है। सर्किट में फलस्वाड़ी के सीता माता मंदिर, कोटसाड़ा के महर्षि वाल्मीकि मंदिर, देवल गांव स्थित श्री लक्ष्मण मंदिर समूह, विदाकोटी व देवप्रयाग स्थित श्री रघुनाथ मंदिर को जोड़ने की योजना है।
पौराणिक और आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम के माता सीता को त्यागने के बाद लक्ष्मण उन्हें विदाकोटी में छोड़ वापस अयोध्या लौट गए थे। कोटसाड़ा गांव स्थित महर्षि वाल्मीकि ने सीता माता को अपने आश्रम में रखा था।
मान्यता है कि सीता माता ने फलस्वाड़ी गांव में भू-समाधि ली थी। सनातन समय से फलस्वाड़ी, कोटसाड़ा व देवल गांव के ग्रामीण फलस्वाड़ी में उनके भू-समाधि दिवस को मंसार मेले के रुप में मनाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम, रामायण व माता सीता में आस्था रखने वालों के लिए फलस्वाड़ी गांव सबसे बड़ा धाम है।
फलस्वाड़ी में माता सीता का भव्य मंदिर बनाया जाएगा। मंदिर के लिए उन्होंने श्रद्धालुओं से डेढ़ फुट लंबी व छह इंच चौड़ी शिला, अपने खेत की एक मुट्ठी मिट्टी और 11 रुपये दान में मांगे हैं, जो मंदिर की भव्यता व दिव्यता को अलौकिक रुप देने में अहम योगदान होगा।