भारतीय चिकित्सा परिषद (आईएमसी) उत्तराखंड के पूर्व चेयरमैन दर्शन कुमार की जांच के लिए एसआईटी ने चिकित्सा परिषद उत्तर प्रदेश को पत्र लिखा है। आरोप है कि उनकी 12वीं की मार्कशीट फर्जी है और उन्होंने लखनऊ से ही इंटर्नशिप की थी।
10 जनवरी को एसटीएफ ने बीएएमएस की फर्जी डिग्री के साथ प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों का भंडाफोड़ किया था। उन्हें कर्नाटक के एक विवि की डिग्री मुहैया कराने वाले आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया था। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई। एसपी क्राइम सर्वेश पंवार की अध्यक्षता वाली इस एसआईटी में मुकदमे की विवेचना सीओ अनिल कुमार जोशी कर रहे हैं। अब तक इस मामले में 36 आरोपियों के नाम सामने आ चुके हैं। इनमें से गिरोह के सरगना इमलाख समेत 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच में पाया गया था कि भारतीय चिकित्सा परिषद ने बिना सत्यापन किए इन डाॅक्टरों का पंजीकरण कर लिया। फिर पता चला कि इस मामले में वहां के कुछ कर्मचारी और अधिकारी भी मिले हैं। इनमें भी चार कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एक अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। इस बीच जांच में पाया गया था कि पूर्व चेयरमैन दर्शन कुमार की भी 12वीं की मार्कशीट फर्जी है। सीओ अनिल कुमार ने बताया, दर्शन कुमार ने कॅरियर की शुरुआत में लखनऊ से इंटर्नशिप की थी। ऐसे में उनकी जांच के लिए आईएमसी लखनऊ को पत्र लिखा गया है।
दो आरोपियों ने दिए लिखावट के नमूने
मास्टरमाइंड इमलाख के घर से कुछ हस्तलिखित लिफाफे भी मिले थे। बताया जा रहा है कि इन लिफाफों पर आईएमसी उत्तराखंड के तीन कर्मचारियों विवेक रावत, अंकुर माहेश्वरी और विमल प्रसाद ने फर्जी डॉक्टरों के पते लिखे थे। इसकी जांच के लिए इन कर्मचारियों की लिखावट के नमूने लिए जाने थे। इसी क्रम में सोमवार को अंकुर और विमल ने अपनी लिखावट के नमूने एसआईटी को दे दिए हैं। लेकिन, विवेक रावत बाहर होने के कारण अपने नमूने देने नहीं पहुंच सका। इनका मुख्य आरोपी के पास से मिले लिफाफों की लिखावट से मिलान कराया जाएगा।