देहरादून। पुलिस उप महानिरीक्षक अरुण मोहन जोशी ने ट्रैक्टर की फर्जी बीमा पालिसी बनाने के मामले की विवेचना के लिए अलग से एसआईटी गठित की है। सीओ डालनवाला के पर्यवेक्षण में गठित एसआईटी में एक इंस्पेक्टर और दो उप निरीक्षक शामिल है। एसआईटी को प्रत्येक सप्ताह प्रगति रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए है। इस मामले में आरटीओ ऑफिस की भूमिका भी सवाल के घेरे में है।
अधोईवाला निवासी जुल्फिकार ने ट्रैक्टर-ट्राली का कृषि के बजाए व्यावसायिक वाहन में पंजीकरण कराने को आरटीओ ऑफिस में आवेदन किया था। जुल्फिकार ने आरटीओ आफिस के पास टेबिल लगाकर बैठे एजेंट से बीमा कराया था। इसी बीच छह हजार रुपये की रिश्वत मांगे जाने पर जुल्फिकार ने विजिलेंस में इसकी शिकायत दर्ज करा दी थी। विजिलेंस ने आरटीओ ऑफिस के एक कर्मचारी और दो दलालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इस प्रकरण के तीन माह एआरटीओ ने फरवरी माह में जुल्फिकार को नोटिस जारी किया था। पीड़ित जुल्फिकार ने फर्जी बीमा पालिसी के इस खेल में आरटीओ ऑफिस के कर्मचारियों की सांठगांठ की आशंका जताते हुए डीआईजी अरुण मोहन जोशी को तहरीर दी थी। कप्तान के आदेश पर डालनवाला कोतवाली में एजेंट सिद्धांत आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने फर्जी इंश्योरेंस के मामले की विवेचना को एसआईटी गठित कर दी है। सीओ डालनवाला विवेक कुमार की देख-रेख में गठित एसआईटी में निरीक्षक एमपी पूर्वाल, उप निरीक्षक विजय सिंह और राकेश भट्ट को शामिल किया है। एसआईटी प्रत्येक सप्ताह अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। जोशी ने बताया कि गहनता से जांच कराने को एसआईटी गठित की गई है। एसआईटी को निर्देश दिए गए है कि किसी भी स्तर पर संलिप्तता पाये जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाए। यदि अन्य लोगों के साथ फर्जी बीमा पालिसी का मामला उजागर होता है तो उसमें मुकदमा दर्ज किया जाए।