देहरादून। उत्तराखंड में एकल महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं। यह बात एक्शन एड संस्थान के एक सर्वे में सामने आई है। इसके लिए यहां भी अब अन्य राज्यों की तरह नीति बनाने पर विचार विमर्श किया जा रहा है। इसी कड़ी में सोमवार को उत्तराखंड महिला आयोग, एक्शन एड और अर्पण संस्था के पदाधिकारियों ने विचार विमर्श किया।
जिला पंचायत सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि महिला आयोग की अध्यक्ष विजया बड़थ्वाल उपस्थित थीं। इस दौरान कई संस्थानों की ओर से एकल महिलाओं पर किए गए अध्ययन की रिपोर्ट अध्यक्ष के सामने रखी। संस्थाओं के पदाधिकारियों और सदस्यों की ओर से कई सुझाव भी दिए गए। आयोग की सचिव कामिनी गुप्ता ने एकल महिलाओं के लिए नीति के उद्देश्यों पर भी प्रकाश डाला। एक्शन एड संस्था से मनीषा भाटिया, फ्रेंड्स ऑफ हिमालय के प्रेम बहुखंडी, अर्पण संस्था से रेनू ठाकुर ने एकल महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर विचार रखे। इस दौरान सभी की इस बात पर एकराय हुई कि उत्तराखंड में भी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों की तरह नीति तैयार होनी चाहिए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नेहा कुशवाह ने कई कानूनों की जानकारी दी।